आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में जारी 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में शुक्रवार को पुरुषों की 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के 15 साल के निशानेबाज अनीश भानवाल पहले प्रतिभागी बने हैं, जिन्होंने इतनी कम उम्र में ये कारनामा कर दिखाया है। अनीष की जीत के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। अनीष के जरिए देश की जोली में 17वां मेडल आने के बाद न सिर्फ उनके परिवार में बल्कि हरियाणा भर में जश्न का माहौल है। ऐसे में हरियाणा में न सिर्फ उनके परिवार वाले खुश हैं बल्कि पूरे राज्य में उनके चर्चे हो रहे हैं। बता दें कि अनीष की बहन मुस्कान भी एक शूटर हैं। मुस्कान भी मार्च में आयोजित हुई International Shooting Federation Junior World Cup में गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी हैं।
अनीष की जीत के बाद उनके पिता जगपाल भानवाल का कहना है कि हरियाणा में शूटिंग रेंज बनें, तो और भी तमगे आएंगे। जगपाल ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में अनीश की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इस ख्वाहिश को भी जाहिर किया। अनीश ने शुक्रवार को पुरुषों की 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही नया इतिहास रचा है। वह राष्ट्रमंडल खेलों में सोना जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी हैं। हालांकि, न ही अनीश और न ही उनके परिजनों के लिए यह सफर इतना आसान रहा है।
अनीश के पिता जगपाल ने कहा, हरियाणा में निशानेबाजी के लिए अधिक सुविधाएं नहीं हैं। अगर यहां एक शूटिंग रेंज हो जाती तो देश के लिए अनीश के साथ यहां कई और निशानेबाज हैं, जो पदक जीत सकते हैं। भारत के युवा निशानेबाज अनीश ने न केवल इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि राष्ट्रमंडल खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। उन्होंने 2014 में ग्लास्गो में आयोजित 20वें राष्ट्रमंडल खेलों में आस्ट्रेलिया के डेविड चापमान की ओर से बनाए 23 अंकों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
Karnal: 15-yr-old #AnishBhanwala's family rejoices after he won gold in men's 25m rapid fire pistol event, say, 'Anish has worked very hard for it.' Anish's sister Muskan Bhanwala is also a shooter & won gold at Intn'l Shooting Federation Junior World Cup in March #Haryana #CWG pic.twitter.com/alG2HsUrrA
— ANI (@ANI) April 13, 2018
अनीश ने फाइनल में कुल 30 अंक हासिल किए। उन्होंने रजत पदक जीतने वाले सर्गेई एवेगलेस्की को दो अंक से पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। सर्गेई ने कुल 28 अंक हासिल किए। इंग्लैंड के साम गोविन को 17 अंकों के साथ कांस्य पदक मिला। अनीश को इस ऊंचाई तक पहुंचाने में उनके माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान है। अनीश और अपनी बेटी मुस्कान को एक अच्छा निशानेबाज बनाने के लिए उनके माता-पिता पिछले ढाई साल से अपने गृह प्रदेश हरियाणा से दूर दिल्ली में रह रहे हैं, क्योंकि हरियाणा में शूटिंग रेंज नहीं है। उनका कहना है कि अगर ऐसा हो, तो अन्य खेलों के साथ निशानेबाजी में भी हरियाणा के बच्चे पदक जीत कर लाएंगे।
जगपाल ने कहा, “हरियाणा में शूटिंग रेंज नहीं है। हम दोनों बच्चों के प्रशिक्षण के लिए पिछले ढाई साल से यहीं हैं। अगर हरियाणा में शूटिंग रेंज हो, तो हमें अपना काम छोड़कर दिल्ली आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर करनाल में भी सुविधा मिल जाए, तो कई और परिवार यहां ऐसे हैं जो अपने बच्चों को निशानेबाजी सिखा रहे हैं। वे भी इस तरह से पदक ला सकते हैं। ऐसे में भारत को हरियाणा से भी कई अच्छे निशानेबाज मिलेंगे।”
अनीश की बड़ी बहन मुस्कान (16) भी निशानेबाजी में उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। उन्होंने इस साल मार्च में आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप में महिलाओं की 25 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था। इस टूर्नामेंट में अनीश ने भी दो स्वर्ण और दो रजत तथा एक कांस्य पदक जीता था।
अपने बेटे की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए पिता जगपाल ने कहा, “औलाद की सफलता पर तो हर माता-पिता को गर्व होता है। भगवान से यही प्रार्थना है कि अनीश और मुस्कान इसी तरह भविष्य में देश के लिए पदक हासिल करते रहें और कई ख्यातियां बटोरें।”जगपाल अपनी बेटी के प्रशिक्षण के लिए दिल्ली में हैं। उन्हें इंटरनेट के जरिए अपने बेटे की उपलब्धि की जानकारी मिली। हर ओर से जगपाल को बधाइयां मिल रही हैं और घर में खुशी का माहौल है। अनीश के निशानेबाजी में आने के बारे में पिता जगपाल ने कहा, “अनीश ने पेंथालॉन में हिस्सा लिया था। वह 2013 में पेंथालॉन विश्व चैम्पियनशिप और 2015 में एशिया पेंथालॉन चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने गया था, जहां तैराकी और अन्य स्पर्धाएं एक साथ होती हैं। यहां हमें अनीश के कोच ने कहा कि उसे निशानेबाजी में प्रशिक्षण दिया जाए। तभी से अनीश और मुस्कान इस खेल में प्रशिक्षण

