एकदिवसीय क्रिकेट में भारत ने रविवार (10 दिसंबर) को धर्मशाला में श्रीलंका के खिलाफ पहले वनडे में घरेलू जमीन पर अपना तीसरा सबसे कम स्कोर बनाया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए महेंद्र सिंह धोनी (66) की अर्धशतकीय पारी के दम पर श्रीलंका के खिलाफ 112 रनों का स्कोर खड़ा किया। सबसे ज्‍यादा गेंदे शेष रहते हुए यह भारत की तीसरी सबसे बड़ी हार है। जब-जब ऐसे भारत हारा है, एक खिलाड़ी विरोधी टीम का सदस्‍य जरूर रहा है और उसने मैच पर प्रभाव भी छोड़ा है, उसका नाम है थिसारा परेरा। श्रीलंकाई टीम की कप्‍तानी कर रहे परेरा ने तीन मौकों पर भारत की हार में अहम भूमिका निभाई है। 2010 में श्रीलंका के खिलाफ भारत को 209 गेंद बाकी रहते हार मिली थी। उस मैच में परेरा ने 28 रन देकर 5 विकेट लिए थे। इसके बाद 2012 में जब श्रीलंका ने 181 गेंदें शेष रहते जीत दर्ज की, तब परेरा ने 19 रन देकर 3 विकेट लिए थे। रविवार को हुए मैच में श्रीलंका ने 176 गेंद रहते जीत दर्ज, जिसमें परेरा कप्‍तानी कर रहे थे।

वनडे इतिहास में भारतीय टीम केवल 16 रनों के स्कोर में अपने पांच विकेट गंवाने वाली पहली टीम बन गई है। भारत ने पिछली बार 1983 विश्व कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ 17 रनों के स्कोर पर अपने पांच विकेट गंवाए थे, जिसके बाद दिग्गज आलराउंडर कपिल देव ने नाबाद 175 रनों की पारी खेल भारत की साख बचाई थी।

भारत का घरेलू जमीन पर सबसे कम स्कोर श्रीलंका के खिलाफ ही है। उसने कानपुर में 1986 में श्रीलंका के खिलाफ खेले गए वनडे मैच में 76 रन बनाए थे। 1993 में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 100 रन बनाए थे।

वनडे की एक पारी में सबसे कम स्कोर का रिकॉर्ड जिम्बाब्वे के नाम है। श्रीलंका ने ही उसे 24 अप्रैल 2004 में हरारे में 35 रनों पर समेट दिया था। भारत का न्यूनतम स्कोर भी श्रीलंका के खिलाफ है। श्रीलंका ने ही शारजाह में 29 अक्टूबर 2000 को भारत को 54 रनों पर ढेर कर दिया था।

भारत के शीर्ष पांच बल्लेबाजों ने इस मैच में सबसे कम स्कोर का रिकॉर्ड भी बनाया। पांच बल्लेबाजों ने केवल 13 रन बनाए। इससे पहले, भारतीय टीम के शीर्ष पांच बल्लेबाजों ने 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ चेन्नई में 18, श्रीलंका के खिलाफ साल 2000 में शारजाह में 23, टोरंटो में वेस्टइंडीज के खिलाफ 1999 में 19 और 1983 में जिम्बाब्वे के खिलाफ टुनब्रिज वेल्स में 15 रन बनाए थे और पांच विकेट गंवाए थे।