पहली बार भारतीय टीम में शामिल किए गए श्रेयस अय्यर ने अपने दूसरे ही मैच में शानदार 88 रनों की पारी खेल सबका दिल जीत लिया। मोहाली वनडे में श्रेयस अय्यर ने रोहित का बखूबी साथ दिया। अय्यर ने पचास गेंदों में ही पचास रन बनाकर इंटरनैशनल मैच में अपना पहला अर्धशतक पूरा किया। आईपीएल और रणजी मैचों में अय्यर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। अय्यर आईपीएल में दिल्लीडेयरडेविल्स की तरफ से कई बेहतरीन पारियां खेली है। श्रेयस बचपन से ही क्रिकेट के पीछे दीवाने थे और इस बात से उनके पिता संतोष अय्यर भलीभांती परिचित थे। यही वजह थी कि काफी छोटी उम्र में ही उन्होंने अय्यर के लिए क्रिकेट कोचिंग लगवा दी। 8 साल की उम्र में ही अय्यर ने इंडियन जिमखाना में 46 बॉल में शतक बनाकर सबको हैरान कर दिया था। अय्यर के पिता एक बिजनसमैन हैं, जिस वजह से वह ज्यादा समय काम के सिलसिले में घर से बाहर ही रहा करते थे।

लेकिन उन्होंने बाहर रहते हुए भी अय्यर को हमेशा सपोर्ट किया। वो जानते थे कि उनका बेटा आगे चलकर एक अच्छा क्रिकेटर बन सकता है। इस वजह से उन्होंने शुरू से ही अय्यर को क्रिकेटरों वाली सभी गुण सिखाने का काम किया। संतोष ने एक बार बताया था कि वह घर के अंदर ही श्रेयस के सामने बॉलिंग किया करते थे। श्रेयस के पिता ने कहा कि पूर्व क्रिकेटर प्रवीण आमरे ने उनके बेटे को एक बेहतरीन क्रिकेटर बनाने में काफी मदद की।
आज अय्यर जब मैदान पर खेलने उतरते हैं तो उमके पिता का खुशी का ठिकाना नहीं रहता। अय्यर का खेलने का अंदाज कुछ-कुछ सहवाग जैसा है, इस वजह से कई लोग उन्हें भारतीय टीम का दूसरा सहवाग कहकर भी पुकारते हैं। विराट कोहली की गैरमौजूदगी में जो मौका अय्यर को मिला है वो उसे यूं ही गंवाना नहीं चाहेंगे।

