इस साल आईपीएल का पहला मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियन्स के बीच शनिवार यानी 7 अप्रैल को होना है। हर साल टू्र्नामेंट में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिलते हैं। इस साल भी फैन्स को उम्मीद होगी कि उन्हें कुछ रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। आईपीएल में ज्यादातर मैचों का फैसला अंतिम ओवर में होता है। कई बार तो अंतिम गेंद तक मैच दोनों तरफ बराबरी का रहता है। ऐसे में, दर्शकों के बीच मैच देखने का मजा दोगुना हो जाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही मैच के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें अंतिम गेंद तक हर शख्स की धड़कनें तेज थीं। दरअसल, साल 2015 में चेन्नई सुपरकिंग्स और दिल्ली डेयरडेविल्स के बीच बेहद अहम मुकाबला खेला जाना था। दोनों ही टीमों के लिए इस मैच में जीत हासिल करना बेहद जरूरी था। इस मैच में दिल्ली के कप्तान जेपी डुमिनी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। चेन्नई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 150 रन बनाए। दिल्ली की टीम इस लक्ष्य को हासिल करने से एक रन से चूक गई और टीम 20 ओवर में 9 विकेट पर 149 रन ही बना सकी।
इस मैच के आखिरी ओवर में दिल्ली को जीत के लिए 19 रनों की जरूरत थी। एबी मॉर्कल दिल्ली के लिए कमाल की पारी खेल रहे थे। धोनी मॉर्कल की काबिलियत से परिचित थे। उन्होंने अंतिम ओवर में ड्वेन ब्रावो को गेंद सौंपी और मॉर्कल को बड़े शॉट्स लगाने से रोकने की कोशिश की। ब्रावो की पहली गेंद पर मॉर्कल ने चौका जड़कर जीत के फासले को 15 रन पर ला दिया। दूसरी गेंद पर मॉर्कल कुछ नहीं कर पाए और 1 रन ही ले पाए। इसके बाद चौथी गेंद पर छक्का लगाकर मॉर्कल ने एक बार फिर दिल्ली की उम्मीदों को जगा दिया।
अब अंतिम दो गेंदों में दिल्ली को जीत के लिए 7 रनों की जरूरत थी। मॉर्कल ने पांचवीं गेंद पर 2 रन लिया। टीम को अंतिम गेंद पर पांच रनों की जरूरत थी। धोनी ने इस बीच आशीष नेहरा से काफी देर तक बातचीत की। धोनी ने ब्रावो के साथ मिलकर रणनीति बनाई, जिसे समझने में मॉर्कल से चूक हुई और अंतिम गेंद पर वह छक्का नहीं लगा पाए। हालांकि, चौका लगाकर वह टीम के लिए सबसे अधिक 73 रनों की पारी खेलने वाले खिलाड़ी बने, पर दिल्ली यह मैच एक रन से हार गई।
