अन्तरर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने एमएस धोनी के ग्लव्ज पर लगे सैन्य प्रतीक को हटाने का निर्देश दिया है। आईसीसी के अनुसार यह नियमों का उल्लंघन है। आईसीसी के इस फैसले पर मशहूर लेखक तारेक फ़तह ने नाराजगी जतायी है। तारेक फ़तह ने ट्वीट कर लिखा कि “आईसीसी ने भारतीय विकेटकीपर और लेफ्टिनेंट कर्नल एमएस धोनी से अपने ग्लव्ज से सैन्य प्रतीक को हटाने को कहा है। तारेक फ़तह ने हैशटैग के साथ धोनी कीप द ग्लव्ज (धोनी अपने गलव्ज मत उतारना) लिखा। इसके बाद उन्होंने लिखा कि बीसीसीआई को धोनी का समर्थन करना चाहिए। एक ऐसे वर्ल्ड कप में जहां बिना मूंछों वाली दाढ़ी रखने वाले इस्लाम के अनुयायियों को बर्दाश्त किया जा रहा है, वहां धोनी के ग्लव्ज से क्या परेशान है।”

अपने एक अन्य ट्वीट में तारेक फ़तह ने पाकिस्तानी टीम के मैदान में नमाज पढ़ने पर भी सवाल खड़े किए। तारेक फ़तह ने लिखा कि “आईसीसी को पाकिस्तानी टीम के क्रिकेट फील्ड पर नमाज पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं है, जो कि ईसाईयों और यहूदियों को बदनाम करती है, लेकिन धोनी के ग्लव्ज पर सैन्य प्रतीक का होना सही नही हैं!” उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में धोनी अपने विकेटकीपिंग ग्लव्ज पर भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज के सैन्य प्रतीक बलिदान बैज को लगाकर मैदान में उतरे थे। धोनी ने स्पेशल फोर्सेज के प्रति सम्मान जाहिर करने के उद्देश्य से ऐसा किया था।

लेकिन आईसीसी ने इस पर आपत्ति जताते हुए इस बैज को हटाने का निर्देश दिया है। आईसीसी ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया है और कहा है कि ग्लव्ज पर सिर्फ मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी के दो लोगो लग सकते हैं, इनके अलावा किसी अन्य लोगो या बैज को लगाना नियमों के विपरीत है। हालांकि इसके लिए धोनी पर किसी तरह का कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है। बता दें कि धोनी भारतीय सेना की टेरीटोरियल आर्मी में ऑनेररी लेफ्टिनेंट कर्नल पद पर नियुक्त हैं। धोनी कई बार सेना के प्रति अपना सम्मान और प्यार जता चुके हैं। बीते मार्च में भी धोनी समेत सभी भारतीय खिलाड़ी भारतीय सेना की कैप पहनकर मैदान में उतरे थे। भारतीय टीम ने ऐसा पुलवामा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से किया था।