विश्व कप विजेता कप्तान अर्जुन रणतुंगा ने कहा कि श्रीलंका में भ्रष्टाचार ‘ शीर्ष पद तक फैला है ’ और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद पर मैच फिक्सिंग रोकने में नाकाम रहने का भी आरोप लगाया। रणतुंगा अभी सरकारी मंत्री हैं, उन्होंने कहा कि श्रीलंका में क्रिकेट में भ्रष्टाचार अल-जजीरा द्वारा रविवार को दिखाए गई डॉक्यूमेंट्री में किए गए दावों से कहीं ज्यादा बड़े स्तर पर मौजूद है।

रणतुंगा ने कहा कि आरोपों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह लंबे समय से चल रहा होगा। यह ऐसी चीज है जो श्रीलंका में शीर्ष स्तर तक फैली है। यह तो बड़े तालाब में छोटी मछली की तरह है। हमेशा की तरह बड़ी मछली बच जाएगी।’’ इस डॉक्यूमेंट्री में आरोप लगाया गया है कि श्रीलंकाई खिलाड़ी और मैदानकर्मी पिच से छेड़छाड़ के षड्यंत्र में शामिल थे तथा भारत और इंग्लैंड तथा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट के दौरान स्पॉट फिक्सिंग की गई थी।

रणतुंगा ने श्रीलंका क्रिकेट के खिलाफ पिछली शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मैं आईसीसी की भ्रष्टाचार रोधी इकाई से बहुत निराश हूं।’’ वह बीते समय में भी श्रीलंका क्रिकेट के अध्यक्ष तिलंगा सुमतिपाला पर जुआ खेलने में शामिल होने के लिये आईसीसी नियमों का उल्लघंन करने का आरोप लगा चुके हैं। हालांकि इस राजनेता और व्यवसायी ने इन आरोपों से इनकार किया था। रणतुंगा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘अगर वे यह नहीं देख सकते कि श्रीलंका में क्या हो रहा है तो उन्हें इस भ्रष्टाचार रोधी इकाई में शामिल नहीं होना चाहिए।’’

बता दें कि टीवी चैनल अल-जजीरा ने “क्रिकेट मैच फिक्सर्स” नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है, जिसमें श्रीलंका में मैच फिक्सिंग गिरोह की सक्रियता का दावा किया जा रहा है। इस डॉक्यूमेंट्री में महाराष्ट्र की ओर से प्रथम श्रेणी मैच खेल चुका रॉबिन मॉरिस दावा करता दिख रहे है कि उसने गॉल के ग्राउंड्समैन को पिच से छेड़छाड़ करने के लिए पैसे दिए थे।