आत्माराम भाटी

खेलों में सब-जूनियर और जूनियर स्तर पर निर्धारित उम्र से ज्यादा के खिलाड़ियों के खेलने का मामला नया नहीं है। जिला से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं में वास्तविक उम्र छिपाकर कागजों पर कम उम्र दिखाने का खेल जारी है। इनमें दोषी केवल खिलाड़ी और उनके अभिभावक ही नहीं, बल्कि इसका प्रमाण-पत्र देने वाली संस्था भी है। इस गड़बड़झाले का नतिजा यह होता है कि न तो टीम को सही प्रतिभा मिल पाती और न ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी को मौका। दरअसल, वास्तविक उम्र को कम करने का सिलसिला हमारे देश में स्कूली खेलों से ही शुरू हो जाता है। इस स्तर पर प्राय: यह देखने में आता है कि स्कूल से प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बच्चे की उम्र को ही प्रमाण-पत्र में कम कर संबंधित संस्था प्रधान द्वारा सत्यापित कर दिया जाता है। ताकि वास्तविक उम्र से कम उम्र के वर्ग के खेलों में बच्चा भाग लेकर जीत की दहलीज पर पहुंचे और स्कूल का नाम रोशन कर करे। खेलों में जूनियर स्तर पर उम्र के प्रमाण के रूप में ज्यादातर मैट्रिक प्रमाण-पत्र में अंकित जन्म तिथि को आधार माना जाता है। जो एक तरह से पूख्ता सबूत उम्र के लिहाज से माना जाता है। इसलिए उम्र के साथ धोखाधड़ी का खेल मैट्रिक से पहले ही मिडिल स्तर की पढ़ाई के दौरान कर लिया जाता है। इसी का फायदा उठाकर कुछ अधिक उम्र के खिलाड़ी राज्य ही नहीं राष्ट्रीय स्तर तक अतिरिक्त खिलाड़ी के रूप में टीम के साथ जाकर प्रमाण-पत्र अपने नाम करने में कामयाब हो जाते हैं।

लेकिन जहां तक ओपन टूर्नामेंट की बात है तो वहां पर सही उम्र का पता लगाने के लिए अभी तक जूनियर स्तर पर दाढ़ी-मुंछ और दांतों को इसीलिए आधार माना जा रहा है क्योंकि खेल संघों को पता है कि खिलाड़ी के उम्र के प्रमाण के रूप में जो शैक्षणिक प्रमाण-पत्र संलग्न किए जाते हैं उनमें कई बार जान-बूझकर उम्र कम दिखाई जाती है। हालांकि राष्ट्रीय खेल संघ को इस परीक्षण में भी अब विश्वास नहीं हो रहा है। क्योंकि अनेक खेलों में एक ही साल में 400 के लगभग ऐसे खिलाड़ी पकड़े गए हैं जो निर्धारित उम्र से अधिक के पाए गए। अधिक उम्र में खेलने वाले खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा 174 मामले एक साल में एथलेटिक्स में सामने आए हैं। दूसरे नंबर पर फुटबॉल है जिसमें 150 खिलाड़ी उम्र की धोखाधड़ी के कारण पकड़े गए। वहीं भारोत्तोलन में यह संख्या 40 तक है। खास बात यह भी है कि जो खिलाड़ी अत्यधिक उम्र घोटाले में पकड़े गए हैं वे ज्यादातर उन प्रदेशों से हैं जिनका राष्ट्रीय खेलों में पदक जीत के मामले में दबदबा रहता है। इसके कारण दूसरे प्रदेशों के अच्छे सही उम्र के खिलाड़ियों के साथ धोखा हो रहा है।

खेलों में खिलाड़ी की सही उम्र का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय खेल संघ अब सख्त होने के मूड में आ गया है। वे खिलाड़ी की जन्म तिथि के साथ पारंपरिक जांच दाढ़ी-मूंछ और दांतों की संख्या के पैमाने को हटाकर अब खिलाड़ी का बोन टेस्ट करवाने का नियम ला रही है जिसमें रीढ़ की हड्डी का एक्स-रे करवाकर उसकी सही उम्र का पता लगाया जाएगा। अब देखना है कि उम्र की जांच के इस नए परीक्षण से राष्ट्रीय खेल संघ खेलों में उम्र के घोटाले पर लगाम लगाने में कितना कामयाब होता है। विभिन्न खेलों के राष्ट्रीय खेल संघों द्वारा यह भी कठोर नियम लाए जा रहे हैं कि जिस राज्य के खिलाड़ी उम्र की धोखाधड़ी के अपराध में संलग्न पाए जाएंगे उस प्रदेश के संबंधित खेल संघ के सचिव के खिलाफ कार्यवाई की जाएगी। जो खिलाड़ी इसमें दोषी पाया जाता है उस पर भी किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तीन साल का प्रतिबंध लगाया जाएगा। इससे सही प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा।