टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेना किसी भी गेंदबाज के लिए गर्व की बात होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रोमांचक उपलब्धि की शुरुआत कब और किसने की थी? जब क्रिकेट अपने शुरुआती दौर में था तब करीब 147 साल पहले यानी 1879 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के एक तेज गेंदबाज ने ऐसा कारनामा किया, जिसने खेल के इतिहास में उन्हें अमर कर दिया।

तीन लगातार गेंदों पर तीन अंग्रेज बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर उन्होंने न सिर्फ टेस्ट क्रिकेट की पहली हैट्रिक ली, बल्कि मैच की तस्वीर बदल दी। यही वह पल था, जब क्रिकेट को उसका पहला ‘हैट्रिक हीरो’ मिला।

पहले हैट्रिक हीरो: फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ

ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ (Frederick Spofforth) टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले खिलाड़ी थे। फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ की यह हैट्रिक न सिर्फ रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुई, बल्कि इसने पूरे मैच का रुख ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में मोड़ दिया। इंग्लैंड की टीम पहली पारी में सिर्फ 113 रन पर सिमट गई और ऑस्ट्रेलिया ने यह टेस्ट मैच 10 विकेट से अपने नाम किया।

कौन थे फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ?

फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ का जन्म 9 सितंबर 1853 को सिडनी के बालमैन (Balmain) में हुआ था। लंबे कद और तेज रफ्तार के लिए पहचाने जाने वाले फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ दाएं हाथ के गेंदबाज थे। उन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू मार्च 1877 में इंग्लैंड के खिलाफ मेलबर्न में ही किया था।

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फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ ने 10 साल लंबे टेस्ट करियर (1877-1887) में कुल 18 टेस्ट मैच खेले। उसमें उन्होंने 18.41 के शानदार औसत से 94 विकेट झटके। उनके नाम 7 बार पांच विकेट और 4 बार मैच में दस विकेट लेने की उपलब्धि दर्ज है। टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 7 विकेट 44 रन देकर रहा। जनवरी 1887 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए अपना आखिरी टेस्ट (सिडनी) खेला।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी रहा दबदबा

फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ का टेस्ट करियर अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका जलवा लंबे समय तक कायम रहा। उन्होंने 1874/75 से 1887/88 तक चले अपने 23 साल के प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर में 155 मैचों में 853 विकेट झटके। उन्होंने 84 बार पांच और 32 बार दस विकेट लेने का कमाल किया। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके सर्वश्रेष्ठ आंकड़ा 18 रन देकर 9 विकेट रहा, जबकि उनका औसत 14.95 था।

टेस्ट क्रिकेट की पहली हैट्रिक

फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ ने 1877 में डेब्यू के बाद जनवरी 1879 में फिर ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह बनाई। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर बल्लेबाज़ी का फैसला किया, लेकिन यह फैसला जल्द ही गलत साबित हुआ। फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ ने पारी की शुरुआत में ही इंग्लैंड के ओपनर जॉर्ज यूलिट को शून्य पर आउट कर दिया। दूसरे छोर से फ्रैंक एलन ने एलेक्जेंडर वेबे और बनी लुकास को पवेलियन भेजा।

3 गेंद, 3 विकेट और इतिहास

इसके बाद फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ ने मंकी हॉर्नबी को आउट कर इंग्लैंड को एक और झटका दिया। इंग्लैंड का स्कोर उस समय 26 रन पर 4 विकेट था, तभी आया वह ऐतिहासिक पल जो क्रिकेट इतिहास बन गया। फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ ने लगातार तीन गेंदों पर द रेव वर्नन रॉयल, फ्रांसिस मैकिनन और टॉम एम्मेट को आउट कर टेस्ट क्रिकेट की पहली हैट्रिक पूरी की। इंग्लैंड का स्कोर देखते ही देखते 26/7 हो गया।

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फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ का यह पहला टेस्ट पांच विकेट हॉल भी था। इंग्लैंड की टीम पूरी तरह दबाव में आ गई। हालांकि, कप्तान लॉर्ड हैरिस (33) और चार्ली एब्सोलम (52) ने आठवें विकेट के लिए 63 रन की साझेदारी कर टीम को थोड़ी राहत दी, लेकिन अंत में इंग्लैंड की पूरी टीम 113 रन पर सिमट गई। फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ ने पहली पारी में 25 ओवर में 48 रन देकर 6 विकेट लिए।

दूसरी पारी में भी बरपा कहर

ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 256 रन बनाए और 143 रन की बढ़त हासिल की। इंग्लैंड के टॉम एम्मेट के 7 विकेट लेने के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मजबूत स्कोर बनाने में सफल रहे। फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ और फ्रैंक एलन ने दूसरी पारी में भी इंग्लैंड के बल्लेबाजों क्रीज पर टिकने नहीं दिया। फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ ने इस बार 35 ओवर में 62 रन देकर सात विकेट झटके। इंग्लैंड दूसरी पारी में 160 रन ही बना पाया।

इंग्लैंड के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए सिर्फ 18 रन का लक्ष्य मिला, जिसे उसने महज 2.3 ओवर में बिना कोई विकेट खोए हासिल कर लिया। फ्रेडरिक स्पॉफोर्थ दूसरी पारी में हैट्रिक तो नहीं ले पाए, लेकिन मैच में 110 रन देकर 13 विकेट लेकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया।