Psychology Behind Kipling: एक ही घर, कमरा और बिस्तर भी एक….लेकिन दिलों में मीलों का फासला। कैसा अकेलापन है ये जो अंदर ही अंदर जिंदगी को डस रहा है। क्या आपने कभी अपने रिश्ते में ऐसा अहसास महसूस किया है? ऐसे रिश्ते की सच्चाई क्या है? इस रिश्ते का नाम क्या है जहां सिर्फ दो लोग साथ रहते हैं, लेकिन प्यार नहीं करते, सिर्फ एक दूसरे को झेल रहे हैं। साइकोलॉजी में इस रिश्ते को एक नाम दिया गया है जिसे किपलिंग कहते हैं, अब सवाल ये उठता है कि ये किपलिंग है क्या और इसे कैसे समझें?

किपलिंग है क्या?

किपलिंग एक ऐसा टर्म है जिसे हम साइकोलॉजिकल टर्म में इस्तेमाल करते हैं जो एक बिहेवियरल पैटर्न है। ये एक ऐसा रिश्ता है जिसमें इंसान किसी न किसी मजबूरी की वजह से रिश्ते में टिका रहता है। किपलिंग को आसान शब्दों में समझें तो इसका मतलब होगा रिश्ते को सिर्फ खींचना उसे जीना नहीं। भारत में हर घर में ऐसा रिश्ता देखने को मिल सकता है। घर में मां-बाप के साथ नहीं बनती लेकिन साथ रहना मजबूरी या जरूरी है, पति पत्नी साथ रहते हैं लेकिन प्यार नहीं अकेलापन है, लीव इन में रहते हैं एक दूसरे के सेक्स पार्टनर हैं लेकिन भावनात्मक जुड़ाव नहीं? ये सभी किपलिंग रिलेशनशिप है। आप जिंदगी भर एक ऐसे रिश्ते को ढो रहे हैं जिसे मनोविज्ञान में ‘Kipling’ या डेड-एंड रिलेशनशिप कहा जाता है। यह रिश्ता प्यार की डोर से नहीं, बल्कि अकेले रह जाने के डर से टिका है। आइए साइकोलोजिस्ट से समझते हैं इस रिश्ते की सच्चाई और मानसिक स्थिति पर इसका असर।  

क्या किपलिंग प्यार की कमी है या डर की मौजूदगी?

दो लोग साथ हैं, सालों से साथ है, राशन, बिल और जिंदगी के सारे मसले मसाइल निपटा रहे हैं लेकिन फिर भी खुश नहीं है, उनके बीच दूरी है। रिश्ते की ये दूरी किपलिंग है। खामोशी की ये साइकोलॉजी, जो धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर देती है। ऐसे रिश्ते में इंसान खुश नहीं रहता सिर्फ इसलिए उसके साथ जुड़ा है क्योंकि ये रिश्ता कन्वेनिएंट है। इस रिश्ते में इंसान को एक दूसरे को खोने का अकेलेपन का डर सताता है।

किस तरह के रिश्तों में किपलिंग ज्यादा देखने को मिलती है?

किपलिंग एक ऐसी मनोवैज्ञानिक स्थिति है जो हर तरह के रिश्ते में हो सकती है। ये माता-पिता, बहन-भाई, शादी, लिव-इन रिलेशन, लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप या इमोशनल डिपेंडेंसी वाले रिश्तों में भी हो सकती है। लेकिन सबसे ज्यादा ये रोमांटिक रिलेशनशिप में होती है।

किपलिंग के शिकार रिश्ते में कन्वीनियंस तलाशते हैं या प्यार ?

किपलिंग एक ऐसी स्थिति है जिसमें आप चुपचाप, बिना किसी झंझट, परेशानी और झगड़े के साथ खामोशी से अपनी कन्वीनियंस के मुताबिक जिंदगी गुजारते हैं। पार्टनर के साथ रिलेशन में ये स्थिति ज्यादा देखने को मिलती है। इस रिश्ते में साथ रहते हैं लेकिन साथ रहना नहीं चाहते, ये आपकी आदत है लेकिन साथ नहीं रहना चाहते। ये वो रिश्ता है जहां कुछ गलत नहीं होता लेकिन प्यार की कमी होती है।

किपलिंग में लोग क्यों फंसते हैं?

हर इंसान की चाहत होती है कि उसकी जिंदगी में कोई रहे, ऐसे में लोगों को एक दूसरे को खोने का डर रहता है, अकेलेपन का डर रहता है, कॉन्फिडेंस में कमी होती है और लोग किपलिंग में फंस जाते हैं। किपलिंग में वो लोग फंसते हैं जो ट्रामा के बाद खुद को सेफ्टी जोन में महसूस करते हैं और इस तरह  के रिश्ते में फंसे रहते हैं। लोग आने वाले कल से डरते हैं इसलिए इस रिश्ते में फंसे रहते हैं जहां उन्हें जिंदगी का सुकून नहीं मिलता। ऐसे रिश्ते में पीड़ित इंसान को कोई बेटर ऑप्शन नहीं मिलता इसलिए वो इस रिश्ते में फंसा रहता है। आप ऐसे रिश्ते की तलाश में हैं जहां आप रिश्ते में गर्मी महसूस करें ना कि ऐसा रिश्ता जहां अपनी भावनाओं को दबाकर रखा जाता है।    

क्या सेक्सुअल या इमोशनल दूरी किपलिंग का हिस्सा होती है?

Enso Wellness में सीनियर काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट अरौबा कबीर ने बताया कुछ लोगों का सेक्सुअल रिलेशन इमोशन से जुड़ा होता है, लेकिन जो लोग किपलिंग के शिकार है उनका अपने पार्टनर से सेक्सुअल रिलेशन तो होता है लेकिन भावनात्मक कोई रिश्ता नहीं होता। जो लोग किपलिंग के शिकार होते हैं वो अपने पार्टनर के साथ सेक्सुअली पूरी तरह सही होते है। उन्हें हफ्ते में जितने दिन भी फिजिकल इंटीमेसी बनाना है वो हमेशा पक्की रहती है। ऐसे कपल्स एक-दूसरे के साथ अपने इमोशन शेयर नहीं करते, सीक्रेट नहीं रहते, हर बात शेयर नहीं करेंगे, झगड़ा हक से नहीं करेंगे, डरते रहेंगे।

लोग अकेले रहने से इतना डरते क्यों हैं?

लोग अकेले रहने के डर से उस रिश्ते में फंसे रहते हैं जिसमें उनका भावनात्मक जुड़ाव नहीं है, इसका सीधा संबंध बचपन, परवरिश या ट्रॉमा से होता है। ऐसे लोग ये सोचते रहते हैं कि अगर रिश्ता तोड़ दिया तो वो अकेले सब कैसे हेंडल करेंगे, समाज में लोग उनके बारे में क्या कहेंगे। इस रिश्ते में वो लोग फंसते हैं जिन्हें बचपन से कभी सपोर्ट नहीं किया जाता। उन्हें आगे बढ़ने के लिए कभी सहारा नहीं दिया गया। आप बड़ी फैमिली में साथ रहते हैं लेकिन आप अकेले रहने से डरते हैं इसलिए भी आप किपलिंग के शिकार होते है। किपलिंग का शिकार वही लोग होते हैं जो डर के साथ जीते हैं। फैमिली प्रेशर और सोसाइटी का प्रेशर किपलिंग का शिकार बनाता है।

किपलिंग का मेंटल हेल्थ पर असर

किपलिंग एक ऐसी जर्नी है जो इमोशनल जर्नी से शुरु होता है और मेंटल जर्नी पर आ जाती है, जिसका मतलब है जब आप ऐसे रिश्ते में रहते हैं तो आपको अकेलापन और तनाव फील होता है जो धीरे-धीरे डिप्रेशन और एंग्जायटी में तब्दील हो जाता है। किपलिंग में फंसे रहने से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। ऐसे रिश्ते में रहने से लोगों में कॉन्फिडेंस खत्म हो जाता है और वो हमेशा अकेले रह जाते हैं

किपलिंग का रिश्ता खत्म करना जरूरी है या उसके साथ रहा जा सकता है?

एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसी कोई चीज नहीं है जिसपर काम किया जाए और वो ठीक नहीं हो। अगर आप किपलिंग के शिकार हैं तो रिश्ते पर काम करें। इस रिश्ते को भी सुधारा जा सकता है। अगर रिश्ते में हिंसा नहीं, गाली गलौज नहीं है तो उस रिश्ते को सुधारा जा सकता है। अगर दोनों पार्टनर चाहते हैं उस रिश्ते से जुड़े रहे तो दोनों इस रिश्ते पर काम करें। आप अपने पार्टनर को बिना डराए-धमकाएं, बिना जहरीले शब्दों का इस्तेमाल किए रिश्ते को भावनात्मक रूप देना चाहते हैं तो आप खुद को बदलना शुरु करें। इस रिश्ते में भी गुंजाइश अभी बाकी है…….

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों से जुड़े एक मनोवैज्ञानिक पैटर्न को समझाने के उद्देश्य से लिखी गई है। इसमें इस्तेमाल किया गया शब्द ‘किपलिंग’ किसी आधिकारिक मेडिकल या क्लिनिकल डायग्नोसिस का नाम नहीं है, बल्कि विशेषज्ञों द्वारा समझाया गया एक व्यवहारिक और भावनात्मक संदर्भ है। इस लेख में बताए गए अनुभव हर व्यक्ति या हर रिश्ते पर समान रूप से लागू हों, यह ज़रूरी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से भावनात्मक तनाव, अकेलेपन, डिप्रेशन या एंग्ज़ायटी का अनुभव कर रहा है, तो उसे किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या काउंसलर से पेशेवर सलाह लेनी चाहिए।

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