यूट्यूबर और तर्कवादी विचार रखने वाले लियाक्कथली सी. का चैनल कॉपीराइट स्ट्राइक के कारण बंद होने की कगार पर था और वह इस मामले में केरल हाईकोर्ट पहुंचे थे। हाई कोर्ट के जस्टिस जियाद रहमान एए ने उनकी याचिका को स्वीकार किया और इस मामले में केंद्र सरकार और गूगल इंडिया को नोटिस जारी किया है।
कौन हैं लियाक्कथली?
लियाक्कथली ‘एक्स-मुस्लिम्स ऑफ केरल’ संगठन के अध्यक्ष हैं। यह संगठन ऐसे लोगों की मदद करने के लिए बनाया गया है जिन्होंने इस्लाम धर्म छोड़ दिया है। लियाक्कथली रूढ़िवादी धार्मिक प्रथाओं की आलोचना करते हैं।
वह “Liyakkathali CM” नाम से यूट्यूब चैनल चलाते हैं। इस चैनल पर उनके लगभग 1.6 लाख सब्सक्राइबर हैं और उन्हें 5.58 करोड़ से अधिक व्यूज मिल चुके हैं।
लियाक्कथली ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके यूट्यूब चैनल पर जो भी डिजिटल कॉन्टेंट है वह तर्कवाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रूढ़िवादी धार्मिक सिद्धांतों की निष्पक्ष आलोचना के बारे में है। वह इसे लेकर संविधान के अनुच्छेद 51-A(h) का हवाला देते हैं।
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यह विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह लड़ाई दिसंबर 2025 के अंत में तब शुरू हुई जब उन्होंने “मुर्तद्द” शीर्षक से एक नया प्रोजेक्ट लाने का ऐलान किया। “मुर्तद्द” का मतलब होता है इसके बाद उनके चैनल पर कई लोगों ने और धार्मिक संगठनों ने कॉपीराइट की शिकायत करना शुरू कर दिया। ऐसे संगठनों और लोगों में विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन और इस्लामी उपदेशक एमएम अकबर भी शामिल हैं।
यूट्यूब की पॉलिसी कहती है कि यदि किसी चैनल को 90 दिन के अंदर तीन कॉपीराइट स्ट्राइक मिलती हैं तो उसे बंद किया जा सकता है। लियाक्कथली के चैनल को 8 स्ट्राइक मिलीं, इसमें से एक को बाद में हटा दिया गया। इसके बाद यूट्यूब ने उन्हें बताया कि उनका चैनल 9 जनवरी, 2026 को बंद कर दिया जाएगा। लियाक्कथली ने 1 जनवरी के बाद से कोई वीडियो अपलोड नहीं किया है।
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लियाक्कथली के जिन वीडियो को लेकर स्ट्राइक आई, उनमें धार्मिक उपदेशकों के भाषणों की छोटी-छोटी क्लिप या “ट्रेलर” शामिल थे। लियाक्कथली ने इन क्लिप्स या ट्रेलर का इस्तेमाल वीडियो में आलोचनात्क विश्लेषण करने के लिए किया था।
लियाक्कथली का कहना है कि ‘फेयर यूज’ (Fair Use) के तहत वह ऐसा कर सकते हैं।
‘फेयर यूज’ क्या है?
‘फेयर यूज’ एक कानूनी सिद्धांत है जो कॉपीराइट धारक की अनुमति लिए बिना कॉपीराइट सामग्री के लिमिटेड कॉन्टेंट के उपयोग की अनुमति देता है। लियाक्कथली का कहना है कि उन्होंने किसी के वीडियो के केवल उतने हिस्सों को दिखाया था जो अवैज्ञानिक, असंवैधानिक और पुरातनपंथी विचारों को लोगों के सामने लाने और उनका खंडन करने के लिए जरूरी थे।
लियाक्कथली ने अपनी याचिका में IT नियमों के नियम 3(1)(B)(iv) और IT Act, 2000 के प्रावधानों को चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि ये नियम सोशल मीडिया कंपनियों को असीमित और मनमाना अधिकार देते हैं। उन्होंने याचिका में यह भी कहा है कि कोई निजी कंपनी अपने सिस्टम या नीतियों के आधार पर किसी को चुप नहीं करा सकती।
IT Rules, 2021 को बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए लाया गया था लेकिन इन नियमों की आलोचना यह कहकर की जाती है कि ये नियम प्लेटफार्मों को जिम्मेदारी से बचने के लिए कॉन्टेंट को ज्यादा सेंसर करने के लिए प्रेरित करते हैं।
लियाक्कथली ने अदालत से मांग की है कि वह सरकार को यह निर्देश दे कि सोशल मीडिया पर सेंसरशिप सख्ती से लागू की जाए।
लियाक्कथली की याचिका को अदालत द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा कॉन्टेंट मॉडरेशन और अभिव्यक्ति की आजादी को किस तरह हैंडल किया जा रहा है, इसे लेकर सवाल जरूर खड़ा हुआ है।
