प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 1968 में जब वेनेजुएला के साइमन बोलिवर एयरपोर्ट पर उतरीं तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। यह पहली बार था जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री इस लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में पहुंचा था। इंदिरा गांधी का स्वागत वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति राउल लियोनी और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने किया।
एयरपोर्ट पर पहले भारतीय राष्ट्रगान और उसके बाद वेनेजुएला का राष्ट्रगान बजाया गया।
इंदिरा गांधी लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के दौरे पर गई थीं। इस दौरान वह ब्राजील, चिली, उरुग्वे और अर्जेंटीना भी गईं। इंदिरा गांधी वेनेजुएला में केवल 18 घंटे रुकीं लेकिन उनकी वहां के नेताओं और लोगों के साथ काफी अच्छी मुलाकात हुई।
वेनेजुएला में आमने-सामने रूस और अमेरिका
काराकास स्थित भारतीय दूतावास द्वारा 2013 में प्रकाशित की गई किताब- Indira Gandhi in Venezuela (1968-2013): 45th Anniversary of a Historic Visit से पता चलता है कि वेनेजुएला के लोगों ने इंदिरा गांधी के प्रति अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त किया था।
एयरपोर्ट पर उमड़ पड़े थे लोग
एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग आए हुए थे जो इंदिरा गांधी की एक झलक पाने के लिए बेताब थे। इंदिरा गांधी ने हरे रंग की साड़ी पहनी थी। उनके गले में मोतियों की माला थी। रनवे को दोनों देशों के झंडों से सजाया गया था और वहां उत्सव जैसा माहौल था।

प्रोटोकॉल तोड़ने की मांगी इजाजत
इंदिरा गांधी ने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति से प्रोटोकॉल को तोड़ने की अनुमति मांगी थी जिससे वह वेनेजुएला के लोगों और बच्चों के साथ-साथ वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों के द्वारा दिए गए गुलदस्ते स्वीकार करने के लिए उनके पास जा सकें।
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आधिकारिक वाहन में बैठने से पहले इंदिरा गांधी ने एक बार फिर प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया और वेनेजुएला में यूनेस्को के एक अधिकारी की बेटी एम. राव से फूलों का गुलदस्ता स्वीकार करने के लिए रुक गईं। इंदिरा गांधी जब एयरपोर्ट से राजधानी काराकास के लिए रवाना हुईं तो एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों ने भारत का राष्ट्रगान गया।
काराकास में वह सबसे पहले राष्ट्रीय समाधि स्थल गईं, वहां उन्होंने साइमन बोलिवर की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। साइमन बोलिवर को वेनेजुएला को स्पेनिश औपनिवेशिक शासन से मुक्ति दिलाने वाले नेता के रूप में जाना जाता है। यहां भी इंदिरा गांधी के स्वागत में कई लोग मौजूद थे। लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया और ऑटोग्राफ मांगा।
क्या कहा इंदिरा ने?
इंदिरा गांधी ने यहां अपने भाषण में कहा, “मैं लैटिन अमेरिका और अपने देश के बीच प्रेम के पुल बनाने आई हूं।” उन्होंने इच्छा जताई कि भारत और वेनेजुएला के लोगों के बीच संबंध मजबूत हों। राष्ट्रपति लियोनी ने कहा कि वेनेजुएला भी भारत की तरह ही आर्थिक असमानता से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों ही देशों के लक्ष्य एक हैं।
इंदिरा गांधी के वेनेजुएला से रवाना होने से पहले दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी किया जिसमें काराकास में एक स्थाई दूतावास खोलने की योजना के बारे में ऐलान किया गया। इसका मकसद यह था कि दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक संबंध मजबूत हों।
इंदिरा ने लोकसभा में दिया था बयान
इंदिरा गांधी ने भारत लौटने के बाद लोकसभा में अपने इस दौरे के बारे में बताया था। इंदिरा ने लोकसभा में बताया कि महात्मा गांधी, रविंद्र नाथ टैगोर और जवाहरलाल नेहरू दक्षिण अमेरिकी देशों में जाने-पहचाने नाम हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की 1968 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने कहा, “हर जगह हमारे वर्तमान प्रयासों में गहरी रुचि है और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देने के हमारे प्रयासों को समझा जा रहा है।”
पिछले कुछ दशकों में भारत और वेनेजुएला के बीच के संबंध काफी हद तक भुला दिए गए हैं लेकिन कुछ जगहों पर इनके निशान मौजूद हैं। जैसे- पश्चिम बंगाल के एक गांव में एक प्राथमिक विद्यालय और नई दिल्ली के राजनयिक एन्क्लेव में एक सड़क को साइमन बोलिवर के नाम पर रखा गया है।
