हिंदी और मराठी फिल्मों की एक ऐसी अदाकारा, जिन्होंने लगभग 30 सालों तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, मगर आज कम ही लोग उनकी बात करते हैं, उनकी जिंदगी फिल्मी दुनिया से भी ज्यादा दिलचस्प और कई जगह दर्दनाक रही। जनसत्ता स्पेशल में हम आज आपको बताने वाले हैं अभिनेत्री नंदा की।

नंदा का असली नाम नंदिनी कर्नाटकी था। उनका जन्म 8 जनवरी 1939 को एक फिल्मी परिवार में हुआ था। नंदा के पिता मास्टर विनायक एक अभिनेता और फिल्म निर्देशक थे। उन्होंने कई मराठी और हिंदी फिल्मों में काम किया। जब नंदा छोटी थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया था, नंदा घर की सबसे बड़ी बेटी थीं इसलिए परिवार का आर्थिक दबाव नंदा पर आ गया। इस वजह से नंदा ने बचपन से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया और सिल्वर स्क्रीन पर बेबी नंदा का नाम से मशहूर हो गईं।

नंदा का फिल्मी करियर

जब नंदा 15 साल की हुईं, तो उनके चाचा और फिल्ममेकर वी. शांताराम ने उन्हें अपनी फिल्म ‘दीया और तूफान’ में राजेंद्र कुमार के अपोजिट हीरोइन के रूप में कास्ट किया। ये फिल्म भले ही न चली हो मगर इससे नंदा को बॉलीवुड में लीड रोल में काम करने का मौका मिल गया। उन्होंने ‘छोटी बहन’, ‘धूल का फूल’, ‘भाभी’, ‘काला बाजार’, ‘कानून’, ‘इत्तेफाक’, ‘हम दोनों’, ‘जब जब फूल खिले’, ‘गुमनाम’, ‘प्रेम रोग’, ‘द ट्रेन’ जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। उनकी खूबसूरती और सहज अभिनय दर्शकों को खूब पसंद आता था। उन्होंने अपने करियर में 70 से अधिक फिल्मों में काम किया।

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आजाद हिंद फौज में शामिल होना चाहती थीं नंदा

नंदा ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में उनका सपना था कि वो आजाद हिंद फौज का हिस्सा बनें और देश की आजादी में योगदान दें। लेकिन जिंदगी ने उन्हें फिल्मों का रास्ता दिखाया हालांकि देशभक्ति की भावना उनके अंदर मौजूद रही, भले ही वो एक्टिव होकर आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ पाईं।

नंदा की पर्सनल लाइफ

नंदा की जिंदगी का एक बेहद अहम और भावुक पहलू उनका प्यार था। फिल्ममेकर मनमोहन देसाई और नंदा के बीच गहरा लगाव था। दोनों मन ही मन एक दूसरे को पसंद करते थे। मनमोहन देसाई अक्सर नंदा के करीब आने की कोशिश करते रहते थे, नंदा भी उन्हें चाहती थीं, लेकिन रिश्ता शुरू करने में झिझक रही थीं। मनमोगन देसाई ने भी कभी सामने से सीधा नहीं पूछा। शशि कपूर ने भी नंदा को बताया था कि मनमोहन देसाई उनकी तरफ आकर्षित हैं।

परंतु मनमोहन देसाई ने आखिरकार अपनी मां की पसंद की लड़की जीवनप्रभा से शादी कर ली। दिलचस्प बात यह थी कि जीवनप्रभा का चेहरा नंदा से काफी मिलता-जुलता था। मनमोहन देसाई अपनी पत्नी से कहते भी थे कि वो नंदा जैसी दिखती हैं इसलिए उनसे शादी की। जीवनप्रभा से उनका एक बेटा हुआ जिसका नाम केतन देसाई था। लेकिन जीवनप्रभा की मौत 1979 में हो गई, जिससे मनमोहन अकेले हो गए।

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नंदा और मनमोहन देसाई का रिश्ता

जीवनप्रभा की मौत के बाद फिल्म निर्माता यश जौहर ने मनमोहन देसाई और नंदा के बीच शादी की बात छेड़ी। उन्होंने अपनी दोस्त वहीदा रहमान से भी मदद मांगी। वहीदा ने शुरुआत में मना किया, लेकिन बाद में वे राजी हो गईं और एक लंच पार्टी का आयोजन किया जिसमें नंदा, मनमोहन देसाई, यश जौहर और वहीदा मौजूद थे। लंच के दौरान वहीदा और यश जौहर बहाना बनाकर चले गए और नंदा और मनमोहन अकेले रह गए। इसी मौके पर मनमोहन ने नंदा को शादी का प्रस्ताव दिया।

नंदा मन ही मन बहुत खुश थीं, लेकिन उन्होंने जवाब देने में समय लिया। बाद में उन्होंने अपने भाई को इस बात की खुशी बताई। सभी चाहते थे कि अब नंदा भी अपना घर बसा लें।

सगाई हुई पर नहीं हो पाई नंदा संग मनमोहन देसाई की शादी

1992 में नंदा और मनमोहन देसाई की सगाई हो गई थी। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। 1994 में मनमोहन देसाई की एक दुखद दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वे अपने घर की बालकनी से गिर गए थे। इस हादसे ने नंदा को पूरी तरह से तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने कभी शादी नहीं की और जीवनभर अकेली रहीं, अपनी यादों के सहारे।

नंदा का निधन

25 मार्च 2014 को 75 साल की उम्र में नंदा का निधन हुआ। आज भी उनके फैंस उन्हें प्यार और सम्मान से याद करते हैं।