इस वक्त ‘धुरंधर’ की सफलता को देखते हुए ये बात चर्चा का विषय बन गई है कि पिछले कुछ समय से केवल मारधाड़, खून खराबे वाली फिल्में ही बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन क्यों कर रही हैं। इसके जवाब में कई तर्क निकलकर सामने आए हैं। जैसे एक्शन के साथ मार काट देखना दर्शकों को पसंद आ रहा है। इसके साथ ही एक तर्क ये भी निकलकर आया है कि इससे पहले ‘केजीएफ’ और ‘एनिमल’ जैसी वॉयलेंस वाली फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर गईं, इसलिए इंडस्ट्र इस फॉर्मूले को दोहरा रही है। मगर ऐसा नहीं है कि आज के दौर में ही इस तरह की फिल्में बनाई या पसंद की जा रही हैं। पहले भी कई ऐसी फिल्में बनीं, जिनमें ऐसे खतरनाक सीन दिखाए गए।
बहुचर्चित फिल्म ‘शोले’ उनमें से एक है, उसमें भी बहुत हिंसा दिखाई गई थी और वो भी अपने जमाने की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म थी। आज इस खबर के जरिए हम आपको उस फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से लेकर उसमें दिखाए गए दिल दहला देने वाले सीन के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही हम आपको अन्य कुछ फिल्मों के बारे में भी बताएंगे, जिनमें क्रूरता दिखाई गई है।
‘शोले’ का बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड
करीब 3 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया था। Sacnilk के अनुसारभारत में इसने लगभग 15 से 15.50 करोड़ नेट की कमाई की थी, जबकि वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 30 से 50 करोड़ के बीच रहा था। अपनी रिलीज के समय इस फिल्म ने ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी बड़ी फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म का खिताब हासिल किया था।
5 सालों तक थिएटर पर किया कब्जा
ये बड़ी हैरानी वाली बात है, जहां आजकल की फिल्मों का एक महीनें भी थिएटर में टिकना बड़ी बात है, वहीं ‘शोले’ सिनेमाघरों में करीब 5 साल तक लगातार चली थी। अगर महंगाई को ध्यान में रखकर देखा जाए, तो आज के दौर में इस फिल्म की कमाई 3000 करोड़ से भी ज्यादा मानी जाती है, जिससे यह भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार हो जाती है।
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‘शोले’ भारतीय सिनेमा की सबसे ऐतिहासिक और यादगार फिल्मों में से एक है, जो 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी। रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जय–वीरू की दोस्ती, ठाकुर का बदला, गब्बर सिंह का आतंक, रोमांस, एक्शन और इमोशन सब दिखाया गया है। सलीम-जावेद के दमदार डायलॉग, आर.डी. बर्मन के म्यूजिक और अमजद खान के यादगार विलेन गब्बर सिंह ने इस फिल्म को अमर बना दिया। रिलीज के समय फिल्म की रफ्तार काफी धीमी थी, लेकिन बाद में इस फिल्म ने रेस में उस दौर की बाकी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया था।
फिल्म के हिंसा वाले सीन
ये फिल्म गब्बर की गांव में दहशत और जय-वीरू के साथ-साथ ठाकुर के साथ ज्यादती की कहनी है। इसमें कई ऐसे सीन हैं जो आपको परेशान कर सकते हैं। जिनमें से पहले सीन जब गब्बर और उसके डाकू गांव में घुसकर दहशत फैलाता है। वो ठाकुर के परिवार को मौत के घाट उतार देता है। फिल्म का सबसे डरावना सीन जब गब्बर, ठाकुर के दोनों हाथ काट देता है। जय-वीरू की डाकुओं से मुठभेड़, डाकुओं का ट्रेन रोकना और फिर मारधाड़ करना ये सभी हिंसा वाले सीन हैं। फिल्म का अंत भी काफी दिल दहला देने वाला था, लेकिन उसे काट दिया गया था। ठाकुर, गब्बर को बेरहमी से मारता था, मगर असली क्लाइमैक्स कुछ और ही था।
सेंसर बोर्ड के निर्देश पर बदला था क्लाइमैक्स
रिलीज के समय सेंसर बोर्ड ने फिल्म के क्लाइमैक्स में गब्बर की हत्या वाला सीन हटवा दिया था। पहले वर्जन में ठाकुर गब्बर को मार देता है, लेकिन सेंसर के निर्देश के बाद फिल्म में दिखाया गया कि पुलिस गब्बर को गिरफ्तार करती है।
क्या था असली क्लाइमैक्स
फिल्म में दिखाया गया था कि ठाकुर नुकीले जूतों से गब्बर सिंह को जान से मारने की कोशिश करता था। मगर पुलिस ने उसे ये कहते हुए रोक लिया था कि वो कानून को हाथ में ना ले। लेकिन असल में ये सीन काफी खतरनाक था। ठाकुर, गब्बर सिंह को अपने नुकीले जूतों से मारकर बदला लेता है। 50 साल बाद ‘शोले’ का 4K में रिस्टोर्ड वर्जन 12 दिसंबर 2025 को दोबारा रिलीज किया गया। जिसमें इसका असली क्लाइमैक्स दिखाया गया।
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इन फिल्मों में थी दिखाई गई थी हिंसा
‘जंजीर’, ‘दीवार’, ‘प्रतिज्ञा’, ‘धर्मवीर’, ‘त्रिशूल’, ‘गंगा की सौगंध’ समेत कई फिल्में उस वक्त भी ऐसी बनाई गई थीं, जिनमें हिंसा का प्रदर्शन भरपूर था। सभी में इंसाफ, बदले की भावना के चलते ऐसे सीन दिखाई गए थे। मगर ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह को अपने देश के लिए लड़ते हुए दिखाया गया है।
देश के लिए लड़ रहा ‘धुरंधर’
फिल्म की कहानी अपराध, अंडरवर्ल्ड और सत्ता के खेल के इर्द-गिर्द घूमती है। इस तरह की दुनिया में हिंसा सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि किरदारों की भाषा होती है। बिना हिंसा दिखाए यह समझाना मुश्किल होता कि सिस्टम कितना क्रूर और बेरहम है। कई लोगों को फिल्म में दिखाए गई हिंसा से आपत्ति है, लेकिन निर्माताओं ने हिंसा को इसलिए दिखाया ताकि दर्शक उस दुनिया को महसूस कर सकें।
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‘एनिमल’ की हिंसा बेवजह
लोग ‘धुरंधर’ की तुलना रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ से कर रहे हैं। जिसमें रणबीर का किरदार पिता के प्यार की खातिर खूंखार बनता जाता है और पिता को नुकसान पहुंचाने वालों का खात्मा करता जाता है। वैसे तो ये फिल्म एक टूटे हुए इंसान की कहानी है, जो अपने रिश्तों, खासकर पिता के साथ संबंधों में उलझा हुआ है। मगर उस किरदार को ऐसा दिखाया गया है जो टॉक्सिक लगता है। मगर इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर दमदार प्रदर्शन किया था। फिल्म ने वर्ल्डवाइड 917.82 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था।
फिर इस फॉर्मूले पर आई शाहिद की फिल्म
9 जनवरी को शाहिद कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘ओ रोमियो’ का पहला पोस्टर रिलीज हुआ और उसमें भी एक्टर का खून से लथपथ चेहरा देखने को मिला। शाहिद कपूर मुंह खोलकर चीखते हुए नजर आए। इसे देखकर ये साफ होता है कि इस आने वाली फिल्म में भी जमकर वॉयलेंस दिखाई जाने वाली है।
