लाइटहाउस जर्नलिज्म को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो बड़े पैमाने पर शेयर होते हुए मिला। वीडियो में दावा किया गया था कि यह बिहार में चुनाव नतीजों के बाद हो रहे विरोध प्रदर्शनों का है।
यह भी दावा किया गया था कि भाजपा द्वारा बिहार विधानसभा चुनावों में की गई ‘वोट चोरी’ का विरोध करने के लिए लोग सड़कों पर उतरे हैं।
जांच के दौरान, हमें पता चला कि यह वीडियो पुराना और असंबंधित है। वायरल दावा गुमराह करने वाला है।
क्या है दावा?
‘एक्स’ (X) यूजर मंजीत घोशी ने यह वीडियो अपनी प्रोफाइल पर साझा किया।
अन्य यूजर्स भी इसी दावे के साथ वीडियो साझा कर रहे हैं।
जांच पड़ताल:
हमने वीडियो में मौजूद टेक्स्ट को हटाकर, वीडियो से प्राप्त कीफ्रेम्स पर रिवर्स इमेज सर्च चलाकर जांच शुरू की।
हमें पता चला कि यह वीडियो सात सप्ताह पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था।

कैप्शन में सुझाव दिया गया था कि वीडियो जयपुर, राजस्थान का है। टेक्स्ट में बताया गया था कि यह विशाल भीड़ नरेश मीणा के समर्थकों की थी।
हमें एक अन्य इंस्टाग्राम यूजर खुशीराम गुर्जर मिले, जिन्होंने यह वीडियो साझा किया था और वीडियो में नरेश मीणा को टैग किया था। यह वीडियो 25 सितंबर को अपलोड किया गया था।
हमें नरेश मीणा के इंस्टाग्राम हैंडल पर भी 25 सितंबर को पोस्ट किया गया ऐसा ही वीडियो मिला।
कैप्शन में कहा गया था: “झालावाड़-पिपलोदी दुर्घटना में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि देने के लिए बेटे अनिरुद्ध के नेतृत्व में, हमने ‘विशाल मशाल जुलूस’ निकाला।” जगह जयपुर बताई गयी थी।
हमने नरेश मीणा के प्रोफाइल की जांच की, बायो में लिखा था कि वह एक राजनेता और राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व महासचिव हैं।
निष्कर्ष: राजस्थान में सितंबर का पुराना वीडियो बिहार चुनाव नतीजों के बाद विरोध प्रदर्शन का बताकर शेयर किया जा रहा है। वायरल दावा गुमराह करने वाला है।
