बीजेपी में ‘नबीन युग’ की शुरुआत हो चुकी है। नितिन नबीन ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कमान संभाल ली है। नितिन नबीन से पहले अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज भी बीजेपी की कमान संभाल चुके हैं। बीजेपी की बागडोर संभालने वालों में बंगारू लक्ष्मण का नाम भी शामिल है। 

बंगारू लक्ष्मण, बीजेपी की कमान संभालने वाले एकमात्र दलित नेता थे। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे बंगारू लक्ष्मण को साल 2000 में बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। हालांंकि कुछ समय के अंंतराल के बाद ही एक स्टिंग वीडियो सामने आने पर उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। इस वीडियो में बंगारु लक्ष्मण एक कथित हथियार डीलर से पैसे लेते हुए नजर आ रहे थे। कहा जाता है कि बीजेपी ने ही उन्हें 2001 में पद छोड़ने के लिए कहा।

इस मामले में साल 2012 में बंगारु लक्ष्मण को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने चार साल की सजा सुनाई थी। उन्हें 27 अप्रैल 2012 को गिरफ्तार किया गया था लेकिन अक्टूबर में जमानत पर रिहा किया गया था। बीजेपी ने इस मामले से खुद को दूर कर लिया था, पार्टी की तरफ से इसे ‘व्यक्तिगत’ प्रकरण बताया था।

14 साल की उम्र में RSS से जुड़े

साल 1939 में दलित परिवार में जन्मे बंगारू लक्ष्मण 1953 में RSS से जुड़े। राजनीति में एंंट्री से पहले उन्होंने कई जगह नौकरियां कीं। उन्होंने साल 1958 में स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट, 1962 में रेलवे और 1965 में अकाउंटेंट जनरल ऑफिस में काम किया। बंगारू लक्ष्मण ने साल 1969 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा दिया और जनसंघ में शामिल हो गए।

राजनीति में आने के बाद बंगारू लक्ष्मण ने इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ कई आंदोलनों का हिस्सा बने। इमरजेंसी के दौरान उन्हें MISA के तहत गिरफ्तार किया गया और वह 16 महीने जेल में रहे। वह कई संगठनों की ट्रेड यूनियनों के प्रमुख रहे।

साल 1986 में बनाए गए बीजेपी आंध्र प्रदेश के अध्यक्ष

साल 1980 में बीजेपी के गठन के बाद बंगारू लक्ष्मण को आंध्र प्रदेश में बीजेपी का संयोजक बनाया गया। इसके बाद वह स्टेट बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी (1980-1985) और फिर  (1986-88) प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। वह सात साल तक बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे और साल 2000 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। बंगारू लक्ष्मण को बीजेपी ने साल 1996 में गुजरात से राज्यसभा भेजा। वह साल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी बनाए गए।

व्हीलचेयर पर बिताए आखिरी 12 साल

स्टिंग ऑपरेशन के बाद बंगारु लक्ष्मण बीजेपी में अकेले पड़ गए। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस मामले में अकेले ही लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपने जीवन के आखिरी 12 साल व्हीलचेयर पर गुजारे, वह आंशिक रूप से लकवे से पीड़ित थे। बंगारु लक्ष्मण का 1 मार्च 2014 को तेलंगाना के सिंकदराबाद में निधन हो गया। इस रिपोर्ट में पढ़िए बीजेपी कैसे अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनती है?