वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को शनिवार को अमेरिकी सेना द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया। अमेरिका इसे एक सैन्य अभियान के तहत की गई गिरफ्तारी बता रहा है, लेकिन जिस तरह आंखों पर पट्टी और हाथों में हथकड़ी लगाकर एक देश के राष्ट्रपति को ले जाया गया, उसने इसे अपहरण जैसा रूप दे दिया है।

आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। दुनिया के कई देशों में इससे पहले भी शीर्ष राजनीतिक नेताओं का अपहरण किया जा चुका है। किसी को पद पर रहते हुए तो किसी को सत्ता छोड़ने के बाद अगवा किया गया।

इटली: प्रधानमंत्री आल्डो मोरो

इटली के पांच बार प्रधानमंत्री रह चुके आल्डो मोरो का 16 मार्च 1978 को पद पर रहते हुए अपहरण कर लिया गया था। जब वह एक कार्यक्रम में जा रहे थे, तभी रास्ते में उनके सुरक्षाकर्मियों को गोली मार दी गई और उन्हें जबरन अगवा कर लिया गया। इस घटना से पूरे इटली में हड़कंप मच गया। 55 दिनों तक सरकार उन्हें खोज नहीं पाई। आखिरकार 9 मई 1978 को रोम की एक केंद्रीय सड़क पर खड़ी लाल रंग की कार से आल्डो मोरो का शव बरामद हुआ। उनके शरीर पर गोलियों के कई निशान थे। इस हत्याकांड के लिए उग्रवादी संगठन रेड ब्रिगेड्स को जिम्मेदार ठहराया गया। बताया जाता है कि अपहरण के दौरान मोरो ने इच्छा जताई थी कि उनके अंतिम संस्कार में कोई भी इटली का राजनीतिक नेता शामिल न हो और बाद में ऐसा ही हुआ।

अर्जेंटीना: पूर्व राष्ट्रपति पेड्रो यूजेनियो अराम्बुरु

अर्जेंटीना के पूर्व अंतरिम राष्ट्रपति और लेफ्टिनेंट जनरल पेड्रो यूजेनियो अराम्बुरु को 29 मई 1970 को अगवा किया गया था। दो लोग सेना के अफसर बनकर उनके अपार्टमेंट पहुंचे और बहाने से उन्हें पास के गैराज में ले गए। इसके बाद उन्हें एक सफेद रंग की गाड़ी में बैठाया गया। इस पूरे ऑपरेशन को “ऑपरेशन पिंडापॉय” नाम दिया गया था। अराम्बुरु 1955 से 1958 तक अर्जेंटीना के अंतरिम राष्ट्रपति रहे थे। एडुआर्डो लोनार्डी को सत्ता से बेदखल कर पेड्रो ने उनकी जगह ली थी।

दक्षिण कोरिया: किम डे-जुंग

दक्षिण कोरिया के प्रमुख विपक्षी नेता किम डे-जुंग को अगस्त 1973 में टोक्यो के एक होटल के कमरे से अगवा कर लिया गया था। उस समय दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी KCIA (अब NIS) पर इस अपहरण को अंजाम देने का आरोप लगा। किम डे-जुंग की आंखों पर पट्टी बांधी गई, उन्हें पहले नाव और फिर विमान के जरिए दक्षिण कोरिया ले जाया गया। वे तानाशाह राष्ट्रपति पार्क चुंग-ही के कट्टर आलोचक थे। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद उन्हें रिहा किया गया। बाद में वे 1998 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति बने और 2000 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित हुए।

फिनलैंड: राष्ट्रपति कार्लो यूहो स्टॉलबर्ग

फिनलैंड के पहले राष्ट्रपति कार्लो यूहो स्टॉलबर्ग और उनकी पत्नी एस्टर का अक्टूबर 1930 में अपहरण किया गया था। स्टॉलबर्ग 1919 से 1925 तक राष्ट्रपति रहे थे। बताया जाता है कि राष्ट्रवादी और कट्टर कम्युनिस्ट-विरोधी संगठन लापुआ मूवमेंट के सदस्यों ने उन्हें उनके घर के पास से अगवा किया और करीब 430 किलोमीटर दूर ले गए। हालांकि जब अपहरणकर्ताओं को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, तो दोनों को छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद लापुआ मूवमेंट की लोकप्रियता को बड़ा झटका लगा और 1932 में फिनलैंड सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया।

कोलंबिया: इंग्रिड बेटनकोर्ट

कोलंबिया में भी एक प्रमुख राजनीतिक नेता का अपहरण हुआ था। इंग्रिड बेटनकोर्ट, जो पूर्व सीनेटर और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता थीं, 2002 में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार थीं। चुनाव प्रचार के दौरान कोलंबिया के विद्रोही संगठन FARC ने उनका अपहरण कर लिया। उन्हें करीब छह साल तक कोलंबिया के जंगलों में बंधक बनाकर रखा गया। 2 जुलाई 2008 को सेना ने “ऑपरेशन जैक” के जरिए इंग्रिड बेटनकोर्ट और 14 अन्य बंधकों को छुड़ाया। इस घटना के बाद उन्हें दुनिया भर में जबरदस्त पहचान और सम्मान मिला।

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