बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शुक्रवार (23 जनवरी) को भारत के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और उसके मुखिया मुहम्मद यूनुस पर हमला बोला था। शेख हसीना ने यूनुस सरकार को हत्यारा, फांसीवादी और देशद्रोही करार दिया था। शेख हसीना के बयान के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इतनी असहज हो गई कि उसने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर भी चेतावनी दे दी।

शेख हसीना को भाषण की इजाजत देना एक खतरनाक मिसाल- बांग्लादेश

बांग्लादेश ने रविवार को कहा कि वह इस बात से हैरान और स्तब्ध है कि भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को नई दिल्ली में सार्वजनिक भाषण देने की इजाजत दी। बता दें कि 78 साल की शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में हैं। छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के बाद उनका 15 साल का शासन खत्म हो गया था। इसके बाद उन्होंने पहला सार्वजनिक भाषण शुक्रवार (23 जनवरी) को दिल्ली के एक भरे हुए प्रेस क्लब में ऑडियो संबोधन के ज़रिए दिया।

बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “बांग्लादेश की सरकार और लोग हैरान और स्तब्ध हैं। भारतीय राजधानी दिल्ली में इस कार्यक्रम को होने देना और जन हत्यारी शेख हसीना को खुलेआम नफरत भरा भाषण देने देना, बांग्लादेश के लोगों और सरकार का साफ तौर पर अपमान है। शेख हसीना को भाषण देने की इजाज़त देना एक खतरनाक मिसाल कायम करता है जो द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।”

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बांग्लादेश का बड़ा आरोप

शेख हसीना को नवंबर में ढाका की एक अदालत ने गैरमौजूदगी में उकसाने, हत्या का आदेश देने और अत्याचारों को रोकने में नाकाम रहने का दोषी पाया था और उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई थी। बांग्लादेश ने आरोप लगाया कि 23 जून को शेख हसीना को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बयान देने की इजाजत दी गई, जिसमें उन्होंने खुलेआम बांग्लादेश सरकार को हटाने की मांग की।

बांग्लादेश ने यह भी आरोप लगाया कि आने वाले आम चुनाव को पटरी से उतारने के लिए और आम जनता को आतंकी काम करने के लिए शेख हसीना ने खुलेआम उकसाया है। बांग्लादेश ने यह भी कहा कि बार-बार कहने के बावजूद भारत ने अभी तक शेख हसीना का प्रत्यर्पण नहीं किया था। पढ़ें शेख हसीना ने क्या कहा था?