वेनेजुएला में अमेरिकी हमले के बाद से पूरी दुनिया दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है। एक धड़ा मजबूती के साथ वेनेजुएला के समर्थन में खड़ा है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा किए जाने की अमेरिकी कार्रवाई को गलत बता रहा है। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे देश भी हैं, जो अमेरिका की इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं या उसे जायज़ ठहरा रहे हैं।
यहां हम आसान शब्दों में इस पूरे मुद्दे की ग्लोबल पॉलिटिक्स को समझने की कोशिश कर रहे हैं और जानने का प्रयास करेंगे कि इस वक्त कौन-कौन से देश वेनेजुएला के साथ खड़े हैं और कौन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
वेनेजुएला के समर्थन में खड़े देश
रूस के विदेश मंत्रालय ने मादुरो और उनकी पत्नी के खिलाफ की गई अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। रूस ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। मॉस्को का सुझाव है कि इस विवाद को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
चीन ने भी अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। चीन ने अमेरिका को तानाशाही रवैया अपनाने वाला देश करार देते हुए कहा कि वेनेजुएला पर हमले के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन किया गया है। चीन के मुताबिक वेनेजुएला एक संप्रभु देश है और उसके राष्ट्रपति को इस तरह हिरासत में लेना पूरी तरह गलत है।
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कनेल ने अमेरिकी कार्रवाई को एक आपराधिक हमला बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह न सिर्फ वेनेजुएला, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका पर हमला है और इसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद कहा जा सकता है। क्यूबा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वेनेजुएला की मदद के लिए आगे आने की अपील भी की है। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने इस कार्रवाई को कायरतापूर्ण करार दिया है।
ईरान ने भी खुले तौर पर वेनेजुएला का समर्थन किया है और अमेरिकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान ने कहा है कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। तेहरान के मुताबिक इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक नियमों के खिलाफ है और शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
ब्राज़ील ने भी अमेरिकी हमले की निंदा की है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने इसे बेहद खतरनाक कदम बताते हुए कहा कि किसी देश के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करना एक बड़ी लाल रेखा पार करने जैसा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है और यह वेनेजुएला का अपमान करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी गलत संदेश देता है।
अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करने वाले देश
अर्जेंटीना और इक्वाडोर ने खुलकर अमेरिकी रुख का समर्थन किया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियरमिलेई ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इसे “आज़ादी जिंदाबाद” करार दिया। इक्वाडोर के राष्ट्रपति ने भी बयान देकर कहा कि अब अपराधियों का साम्राज्य ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगा।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इटली ने मादुरो की चुनावी जीत को कभी मान्यता नहीं दी और उनके शासन की आलोचना भी करता रहा है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि गलत कामों को खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई हमेशा सही रास्ता नहीं होती।
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