वेनेजुएला पर हुई अमेरिकी कार्रवाई के बाद से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम का सभी को इंतजार है। इस बीच एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि अमेरिका वेनेजुएला के साथ किसी भी तरह के युद्ध में नहीं है। यहां तक कहा गया है कि अमेरिका वेनेजुएला की तेल कंपनियों को मदद करेगी जिससे उनके देश का एनर्जी सिस्टम फिर मजबूत बन सके।

वेनेजुएला में कब होंगे चुनाव, ट्रंप का जवाब

एनबीसी न्यूज से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका शायद प्रयास करे जिससे वेनेजुएला का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर फिर मजबूत हो सके, ऐसा करने में हमें 18 महीने से कम का वक्त लगेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह जानकारी भी दी कि वेनेजुएला में अगले 30 दिनों तक कोई चुनाव नहीं होने वाले हैं। उनके मुताबिक अगर उन्हें वेनेजुएला में अमेरिकी सेना को भेजना होगा तो उन्हें अमेरिकी विधायकों से मंजूरी लेने की कोई जरूरत नहीं है।

इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनका देश किसी भी कीमत पर इस समय वेनेजुएला के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। अब इस बयान के बड़े मायने निकाले जा रहे हैं क्योंकि वेनेजुएला में स्थिति इस समय तनावपूर्ण बने हुए हैं, अमेरिकी हमले में वहां से कम से कम 40 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका को कोई युद्ध शुरू नहीं करने जा रहा है। वैसे एक तरफ ट्रंप ने अमेरिका का स्टैंड साफ किया है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ उनकी एक कार्रवाई ने पूरी दुनिया को भी दो धड़ों में बांट दिया है।

वेनेजुएला के समर्थन में खड़े देश

रूस के विदेश मंत्रालय ने मादुरो और उनकी पत्नी के खिलाफ की गई अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। रूस ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। मॉस्को का सुझाव है कि इस विवाद को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

चीन ने भी अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। चीन ने अमेरिका को तानाशाही रवैया अपनाने वाला देश करार देते हुए कहा कि वेनेजुएला पर हमले के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन किया गया है। चीन के मुताबिक वेनेजुएला एक संप्रभु देश है और उसके राष्ट्रपति को इस तरह हिरासत में लेना पूरी तरह गलत है।

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कनेल ने अमेरिकी कार्रवाई को एक आपराधिक हमला बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह न सिर्फ वेनेजुएला, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका पर हमला है और इसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद कहा जा सकता है। क्यूबा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वेनेजुएला की मदद के लिए आगे आने की अपील भी की है। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने इस कार्रवाई को कायरतापूर्ण करार दिया है।

ईरान ने भी खुले तौर पर वेनेजुएला का समर्थन किया है और अमेरिकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान ने कहा है कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। तेहरान के मुताबिक इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक नियमों के खिलाफ है और शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करने वाले देश

अर्जेंटीना और इक्वाडोर ने खुलकर अमेरिकी रुख का समर्थन किया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियरमिलेई ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इसे “आज़ादी जिंदाबाद” करार दिया। इक्वाडोर के राष्ट्रपति ने भी बयान देकर कहा कि अब अपराधियों का साम्राज्य ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगा।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इटली ने मादुरो की चुनावी जीत को कभी मान्यता नहीं दी और उनके शासन की आलोचना भी करता रहा है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि गलत कामों को खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई हमेशा सही रास्ता नहीं होती।

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