US Tariff Waiver on Russian Energy: पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिकी प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर लगे कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ में ढील दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई इस छूट से भारत और चीन जैसे प्रमुख देशों को बड़ी राहत मिली है।

हालांकि, इस फैसले के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन इस ढील के आर्थिक असर का गहराई से मूल्यांकन करने के लिए 60 दिनों का समय लेगा। उज़्बेकिस्तान और भारत की छह दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए रुबियो ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की जटिलताओं पर प्रकाश डाला।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर

मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह समझना चाहते हैं कि इन प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने या हटाने का असर न केवल दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर, बल्कि खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

‘एक रात में सप्लायर बदलना आसान नहीं’

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्वीकार किया कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाते हुए कई विकल्प तलाशे हैं। इसके बावजूद, भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा अब भी रूस से आयात कर रहा है।

मार्को रुबियो ने कहा, “भारत जैसे देश ने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा स्रोतों में बदलाव करने का प्रयास किया है, लेकिन एक दिन से दूसरे दिन में सप्लायर बदलना बेहद कठिन काम है।” उन्होंने भारत की वकालत करते हुए आगे कहा कि भारत केवल एक बड़ा आयातक ही नहीं, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका का एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी और वैश्विक साझेदार भी है।

क्या है ग्राहम एक्ट और ट्रंप ने क्यों दी निलंबन की मंजूरी?

इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ (जिसे ग्राहम एक्ट भी कहा जाता है) के प्रमुख दंडात्मक प्रावधानों को निलंबित कर दिया था। 18 सितंबर को पारित इस कानून के तहत रूस और ईरान से तेल या ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ और जुर्माना लगाने का अधिकार अमेरिकी सरकार के पास था।

रुबियो के अनुसार, जब यह कानून पारित किया गया था, तभी इसमें ‘छूट’ का प्रावधान जानबूझकर जोड़ा गया था। इसका मकसद अमेरिकी प्रशासन को यह आंकने का समय देना था कि वैश्विक संघर्षों और तनाव के बीच ऊर्जा की आपूर्ति तथा कीमतों पर कितना प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर हुती हमलों तक का दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरों का जिक्र करते हुए रुबियो ने बताया कि मौजूदा संकट केवल एक वजह से नहीं है। दुनिया में ऊर्जा ढांचों को कई तरफ से निशाना बनाया जा रहा है। रुबियो ने जोर देकर कहा कि इन तमाम परिस्थितियों के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें प्रभावित हो रही हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

60 दिनों का मूल्यांकन की बात

अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ किया कि अगले 60 दिनों की अवधि में अमेरिकी वित्त और विदेश विभाग मिलकर इस बात का विस्तृत अध्ययन करेंगे कि रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह 60 दिनों की राहत बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और रूस से मिलने वाला रियायती तेल देश के चालू खाता घाटे और महंगाई को नियंत्रण में रखने में अहम भूमिका निभाता है। रुबियो की भारत यात्रा के दौरान भी इस मुद्दे पर द्विपक्षीय बातचीत होने की पूरी संभावना है।

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