अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर अपनी मंशा जाहिर की है कि उन्हें क्यों चाहिए। उन्होंने नार्वे के प्रधानमंत्री को एक संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने इसके पीछे अजीबोगरीब वजह बताई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को नार्वे के प्रधानमंत्री को एक मैसेज (संदेश) भेजा। जिसमें ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के उनके प्रयासों में से एक बड़ा कारण यह भी है कि उन्हें उनके देश ने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह बातें नार्वे प्रधानमंत्री को टेक्स्ट कर कही है।

नार्वे के प्रधानमंत्री को लिखा संदेश

न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने नार्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को टेक्स्ट संदेश में कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के उनके प्रयासों का एक कारण यह भी है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। आगे ट्रंप ने लिखा, अब उन्हें शांति के बारे में सोचने का कोई दायित्व महसूस नहीं होता और जब तक अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं कर लेता, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं रहेगी। हालांकि यह हमेशा सर्वोपरि रहेगी, लेकिन अब मैं इस बारे में सोच सकता हूं कि अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है।

बता दें कि ग्रीनलैंड पर कंट्रोल के लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति अलग-अलग मंचों से कई बार अपनी बात कह चुके हैं। इस पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि यह बिकाऊ नहीं है। ग्रीनलैंड यहां के निवासियों का है।

यूरोपीय देशों पर लगाया टैरिफ

इसके साथ ही अमेरिका के इरादे को देखते हुए यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में अपनी एक छोटी सेनाएं भेज दी हैं। इसके बाद से ही अमेरिका और यूरोप के देशों के बीच तनातनी दिख रही है। ग्रीनलैंड सीधे तौर पर नाटो का सदस्य नहीं है लेकिन डेनमार्क के कारण वह नाटो की सुरक्षा में आता है।

इधर जब यूरोप के 8 देशों ने ग्रीनलैंड पर अमेरिका के इरादे को विरोध किया तो अमेरिका ने उनपर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। बता दें कि ये आठों देश (डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड) नाटो का हिस्सा है। इन देशों पर एक फरवरी 2026 से टैरिफ लागू होगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका कई सालों तक डेनमार्क और यूरोपीय यूनियन के सभी देशों को सब्सिडी देता रहा है। हमने उन पर टैरिफ या टैक्स नहीं लिया, अब सालों बाद समय आ गया है कि डेनमार्क बदले में कुछ वापस करे क्योंकि अब विश्व शांति दांव पर है।

ग्रीनलैंड में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन

इधर ग्रीनलैंड के निवासियों ने ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ग्रीनलैंड के लोगों ने हाल ही में अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी की और तख्तियां लेकर सड़कों पर निकले।

इससे पहले कर चुके हैं यह भी दावा

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति दावा कर चुके हैं कि उन्हें गोल्डन डोम के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है। गोल्डन डोम एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जो इजरायल के आयरन डोम की तरह मल्टी लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम है।

अमेरिका को क्यों चाहिए ग्रीनलैंड?

ग्रीनलैंड में दुर्लभ नेचुरल रिसोर्सेज मौजूद हैं। जिसमें रेयर अर्थ मैटेरियल भी शामिल हैं। अमेरिका इन रेयर अर्थ मैटेरियल के लिए अभी चीन पर निर्भर हैं और अमेरिका इससे छुटकारा चाहता है, इसलिए वह बार-बार ग्रीनलैंड पर कंट्रोल की बात कर रहा है। साथ ही ग्रीनलैंड अपने स्ट्रैटजिक पोजिशन के कारण भी अहम हैं, इसलिए अमेरिका और भी इसे पाने की आतुर है। आगे पढ़िए ग्रीनलैंड से भारत तक अमेरिकी दबाव की कहानी…भारत को क्यों रहना चाहिए सतर्क? सुरक्षा की गारंटी नहीं है ट्रेड डील