ह्यूस्टन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा कंपनियों के 17 सीईओ से मुलाकात की। इस बैठक के बाद अमेरिका की प्राकृतिक गैस कंपनी टेल्यूरियन इंक और भारत की पेट्रोनेट एलएनजी कंपनी लिमिटेड (पीएलएल) ने एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किएं। इसके तहत पेट्रोनेट और उसकी सहायक इकाइयां अमेरिका से सालाना 50 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करेंगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर बताया कि ह्यूस्टन पहुंचने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारतीय टीम काम पर लग गई। भारत सरकार की संयुक्त उपक्रम कंपनी पेट्रोनेट ने टेल्यूरियन की ड्रिफ्टवुड परियोजना में 2.5 अरब डॉलर का निवेश कर 20 फीसद इक्विटी हिस्सेदारी हासिल करने का भी ऐलान किया। इस समझौते को अमेरिका के एलएनजी क्षेत्र में किसी भारतीय कंपनी की तरफ से सबसे बड़ा सौदा बताया जा रहा है।
इस करार के तहत पेट्रोनेट और उसकी सहायक इकाइयां अमेरिका से 40 साल की लंबी अवधि तक 50 लाख टन एलएनजी का आयात करेगी। इस करार के तहत एलएनजी प्राप्त करने के लिए पीएलएल, लुइसियाना की 28 अरब डॉलर की इस बड़ी परियोजना में इक्विटी निवेश करेगी। दोनों कंपनियों का इरादा इस करार को 31 मार्च, 2020 तक अंतिम रूप देने का है। विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि पेट्रोनेट द्वारा टेल्यूरियन के प्रस्तावित ड्रिफ्टवुड एलएनजी एक्सपोर्ट टर्मिनल में 2.5 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा। इसके एवज में उसे 40 साल तक हर वर्ष 50 लाख टन एलएनजी का अधिकार मिलेगा।
पेट्रोनेट भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक है। इस करार से वह ड्रिफ्टवुड से स्वच्छ व कम लागत वाली बेहतर प्राकृतिक गैस की भारत में आपूर्ति कर सकेगी। बैठक के बाद मोदी ने ट्वीट किया, ‘यह संभव नहीं है कि ह्यूस्टन आएं और ऊर्जा पर बातचीत नहीं हो। ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष सीईओ के साथ शानदार बातचीत हुई। हमने ऊर्जा क्षेत्र में अवसर उत्पन्न करने के तरीकों पर चर्चा की।’
