अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कूटनीति का जवाब देने के लिए पाकिस्तान ने एक नई उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन किया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सूचना मंत्रालय, सैन्य ऑपरेशन डायरेक्टोरेट, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के वरिष्ठ अधिकारी इस कमेटी के सदस्य हैं। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के अनुसार इस कमेटी का काम “व्यावहारिक और टिकाऊ भारत-कश्मीर नीति” तैयार करना है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने मंगलवार (22 नवंबर) को पाकिस्तानी सीनेट को ये जानकारी दी। सरताज अज़ीज़ के अनुसार इस नई कमेटी के प्रमुख पाक विदेश सचिव एज़ाज़ चौधरी होंगे। चौधरी चाहेंगे तो अन्य सदस्यों को इसमें शामिल कर सकेंगे। संसदीय डिफेंस कमेटी और संसदीय फॉरेन अफेयर्स कमेटी को नियमित तौर पर प्रगति की जानकारी देती रहेगी।
अज़ीज़ ने बताया कि पाकिस्तान के सूचना सचिव के नेतृत्व में एक अन्य कमेटी का भी गठन किया है जिसका काम होगा भारत के प्रचार से जुड़े आकंड़े इकट्ठा करना और उसका जवाब देने के लिए एक मीडिया रणनीति बनाना होगा ताकि कश्मीर की आजादी की मांग को लगातार सामने लाया जाता रहे। अज़ीज़ ने पाकिस्तानी उच्च सदन को नियंत्रण रेखा पर मौजूदा स्थिति के बारे में भी जानकारी दी। अज़ीज़ ने बताया कि पाकिस्तानी सूचना मंत्रालय सोशल मीडिया के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के “विवाद” को सबके सामने लाने के लिए एक समेकित रणनीति बनाएगा। अज़ीज़ ने सीनेट से कहा कि नवाज शरीफ सरकार ने पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में अंदर भारत के दखल से जुड़े मामलों को दुनिया में सामने के लिए भी कई कदम उठाए हैं।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को कश्मीर में भारत द्वारा किए जा रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर एक डोजियर सौंपा था। अज़ीज़ ने कहा कि “इस डोजियर को दूसरे महत्वपूर्ण देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ भी साझा किया गया है। जल्द ही कुलभूषण जाधव की गतिविधियों पर भी एक डोजियर तैयार किया जाएगा।” अज़ीज़ के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में पाकिस्तानी और कश्मीरी मूल के प्रवासियों की अहम भूमिका होगी। अज़ीज़ ने दावा किया कि पाक सरकार नरेंद्र मोदी के “अतिवाद” का विरोध करने वाले भारतीयों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए कदम उठा रही है। अज़ीज़ ने कहा, “हमारे विदेशी मिशन, जिसमें नई दिल्ली भी शामिल है, भारतीय अतिवादी नीतियों को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।”
मंगलवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भारतीय डिप्टी हाई कमिश्नर जेपी सिंह को तलब किया था। खबरों के अनुसार पाकिस्तान ने सिंह से 21 नवंबर 2016 को कथित तौर पर भारत की तरफ से हुई सीजफायर उल्लंघन को लेकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। पाकिस्तान ने दावा किया कि भारतीय गोलीबारी में चार आम नागरिक मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2003 में सीजफायर समझौता हुआ था।
18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के उरी स्थित सैन्य कैंप पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले के बाद भारत ने 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कई आतंकियों को मार गिराया था। भारतीय कमांडो ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पारकर की आतंकी ठिकाने भी नष्ट कर दिए थे। भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही पाकिस्तान एक दर्जन से ज्यादा बार जम्मू-कश्मीर में सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है। वहीं घाटी में करीब आधा दर्जन आतंकी हमले भी हो चुके हैं।
