भारत ने चीन के साथ सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी तैयारी पुख्ता करनी शुरू कर दी है। भारतीय सेना चीन से जुड़ी सीमा रेखा पर अपनी ताकत बढ़ाने में लगी हुई है। भारत-चीन की सीमा (LAC) पर सेना ने जवानों की संख्या कई गुना बढ़ा दी है। सीमा पर पहले से ही सैनिकों को तैनात कर दिया गया है। अगले कुछ महीनों में और जवानों के आने की संभावना जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच की सीमा पर अब बंकरों और बंदूकधारियों की बड़ी फौज मौजूद है। NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की People’s Liberation Army (PLA) के साथ भारतीय सेना के एनकाउंटर्स की संख्या बढ़ी है, इसलिए भारत ने अपने क्षेत्र की सुरक्षा और बढ़ा दी है। सैनिकों के अलावा टैंकों और मशीनी इन्फैंट्री को भी सीमा के करीब तैनात किया गया है। सुरक्षा के नजरिए से देखें तो 1962 के भारत-चीन युद्ध से भी ज्यादा सैनिक यहां तैनात किए गए हैं। हाल ही में संकेत मिले थे कि चीन युद्ध की स्थिति में 60,000 से 80,000 जवान भेज सकता है।
1962 में भारत-चीन युद्ध के चार दशकों बाद भी भारत ने जान-बूझकर सीमा के पास कोई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किया। सीमा की सुरक्षा कुछ बटालियंस के हाथ में थी, जिसे इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस और लदाख स्काउट्स का समर्थन मिला हुआ था। 2005 में जब तत्कालीन विदेश सचिव श्याम सरन ने भारत-चीन सीमा पर तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और ताकत बढ़ाने की जरूरत बताई, तब स्थिति में परिवर्तन शुरू हुआ। इसके बाद तेजी से इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया।
2012 में भारत ने पूर्वी लद्दाख में ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा बलों को चीन का सामना करने के लिए तैनात किया। इसके अलावा, सैनिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी यह दर्शाती है कि भारत तैयार है। पहले, ज्यादातर इन्फैंट्री बटालियंस छह महीने तक पूर्वी लद्दाख की सुरक्षा करती थी, उसके बाद सियाचिन ग्लेशियर की तरफ रवाना होती थी। इन्हें ‘लिक बटालियंस’ कहा जाता था। पिछले दो सालों से इन्फैंट्री बटालियंस को भी चीनी सीमा पर तैनात किया गया है।
