पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में चीन और पाक के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों देश इस क्षेत्र में स्वार्थ सिद्ध करने के लिए संसाधनों का गलत ढंग से दोहन कर रहे हैं, जिसको लोगों में रोष है।
जानकारी के मुताबिक स्थानीय लोग पाकिस्तान और चीन के बीच बन रहे चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) का विरोध कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि यह प्रोजेक्ट उन्हें कोई ठोस लाभ प्रदान करने में नाकाम है। 3000 किलोमीटर लंबे इस इकोनॉमिक कॉरीडोर को बनाने में चीन 40 बिलियन डॉलर निवेश कर रहा है। यह कॉरीडोर वेस्टर्न चाइना को साउथर्न पाकिस्तान से रोड, रेलवे लाइंस और पाइपलाइंस के जरिए जोड़ेगा।
इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह चीन और पाकिस्तान का एक झूठ और छलावा है, उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट को बनाने से पहले सभी स्टेक होल्डर्स से सलाह नहीं ली गई है। लोग चाहते हैं कि उन्हें प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी हो, ताकि पता चला सके कि इस प्रोजेक्ट से उन्हें कितना लाभ होगा।
अब्दुल रहमान नाम के एक स्थानीय शख्स का कहना है कि हमें डर है कि कही हमें सिर्फ बैठकर चीन की तरफ से आने वाले ट्रकों की संख्या न गिननी पड़े और जरा-सा भी फायदा न हो। पाकिस्तान इन दिनों बिजली की समस्या से जूझ रहा है और सबसे ज्यादा दिक्कत गिलगित- बाल्टिस्तान में है लेकिन इस क्षेत्र में कोई भी पावर प्रोजेक्ट नहीं है। एक्टिविस्ट्स और स्थानीय लोगों ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सीपीईसी प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर पर्यावरण अंसतुलन उत्पन्न हो सकता है। चाइनीज वर्करों की इस क्षेत्र में मौजूदगी से नौकरी का भी संकट उत्पन्न हो गया है।
कश्मीर नेशनल पार्टी के नेता मोहम्मद नईम खान ने बताया कि सीपीईसी प्रोजेक्ट के अंतर्गत 60 इकोनॉमिक जोन बनाए जा रहे हैं लेकिन इनमें से एक भी गिलगित बाल्टिस्तान और पीओके में नहीं आते हैं। सीपीईसी इन एरियों से होकर गुजरेगा लेकिन यहां सिर्फ कॉरीडोर की सिक्योरिटी के लिए एक आर्मी हेडक्वॉर्टर बनाया गया है। 40 बिलियन डॉलर के इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके में बिल्कुल भी निवेश नहीं हुआ है।
विवादित गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके में चीन का अपना आर्थिक हित है, वह यहां कंस्ट्रक्शन, बांधों का निर्माण और बंदरगाह तक हाई-वे बनाने में लगा है। धीरे-धीरे इस क्षेत्र पर चीन की उपस्थिति बढ़ती जा रही है। प्रोजेक्ट के लिए जरुरी चीजों की आपूर्ति के लिए सरकार और आर्मी बलपूर्वक गिलगित बाल्टिस्तान की ऐतिहासिक भूमि पर कब्जा कर रही है। जिसे लेकर स्थानीय लोगों में रोष है।

