ईरान में हालात पर काबू पाने के सरकारी दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं और कई जगहों पर प्रदर्शनकारी अब भी सरकारी आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद हिंसा कई शहरों तक फैल चुकी है।

हालात ऐसे बन गए हैं कि ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोबीन आज़ाद को सख्त चेतावनी जारी करनी पड़ी है। उन्होंने कहा है कि जो भी ईरानी नागरिक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेगा, उसे ‘अल्लाह का दुश्मन’ माना जाएगा। ईरान में किसी व्यक्ति को अगर ‘अल्लाह का दुश्मन’ घोषित कर दिया जाता है, तो इसका सीधा मतलब फांसी की सजा होता है।

जारी बयान में ईरानी सरकार ने यह भी साफ किया है कि जो लोग प्रदर्शनकारियों या कथित दंगाइयों की मदद करेंगे, उनके खिलाफ भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे। जानकारी के लिए बता दें कि ईरान में विरोध प्रदर्शन करीब दो हफ्ते पहले शुरू हुए थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। हालांकि, ईरान की वास्तविक स्थिति को समझना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि खामेनेई सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और कई इलाकों में फोन लाइनें भी काट दी गई हैं।

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक 72 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। एक तरफ जहां ईरान में हालात बिगड़ते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका लगातार ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दे रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए लिखा है कि इस वक्त अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।

अमेरिका की ओर से यह चेतावनी भी दी गई है कि ईरान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ किसी तरह का ‘खेल’ खेलने की कोशिश न करे। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जब वे कोई बात कहते हैं, तो वे वैसा जरूर करते भी हैं। ईरान के सरकारी स्टेट ब्रॉडकास्ट के मुताबिक, फिलहाल बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही हैं। सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि हालात सामान्य हो रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले की संभावनाओं की भी चर्चा होने लगी है। इस पर ईरान सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की संसद के स्पीकर ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने किसी भी तरह का दुस्साहस किया, तो अमेरिकी सैनिक सीधे ईरान के निशाने पर होंगे।

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