अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था 3 फीसदी से कम की दर से बढ़ेगी और इसमें 3 आधा योगदान भारत और चीन का रहेगा। आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि यूक्रेन युद्ध और कोरोना महामारी के कारण पिछले साल अर्थव्यवस्था में जो गिरावट आई, वो इस साल भी जारी रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की प्रमुख ने विश्व अर्थव्यवस्था की साल 2023 में वृद्धि दर तीन प्रतिशत से भी कम रहने की आशंका जताते हुए गुरुवार (7 अप्रैल, 2023) को इससे वैश्विक स्तर पर भूख और गरीबी के जोखिम बढ़ रहे हैं। क्रिस्टलिना जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक वृद्धि दर के अगले पांच सालों में लगभग तीन प्रतिशत ही रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा, “यह 1990 के बाद से हमारा मध्यम अवधि का सबसे कम वृद्धि पूर्वानुमान है।” उन्होंने कहा कि धीमी वृद्धि एक गंभीर झटका होगा, जिससे कम आय वाले देशों के लिए कठिनाई बढ़ जाएगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पिछले साल 3.4 प्रतिशत रही है। जॉर्जीवा ने यह चेतावनी भी दी कि वैश्विक वृद्धि के सुस्त पड़ने से गरीबी और भुखमरी बढ़ सकती है, जो कोविड संकट के कारण पहले ही चुनौती बनी हुई है। उन्होंने इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति बताया। उनकी यह टिप्पणी आईएमएफ और विश्व बैंक की वाशिंगटन में अगले सप्ताह होने वाली सालाना वसंत बैठकों बैठक से पहले आई है।
भारत ने विश्वस्तरीय डिजिटल ढांचा तैयार किया, दूसरे देश ले सकते हैं सबकः आईएमएफ
आईएमएफ ने कहा कि भारत ने व्यापक उपयोग वाला एक विश्वस्तरीय डिजिटल सार्वजनिक ढांचा खड़ा किया है और दूसरे देश भी उससे सबक ले सकते हैं। डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के तहत विशिष्ट पहचान, यूपीआई और आधार-समर्थित भुगतान सेवा के साथ डिजिलॉकर एवं खाता एग्रिगेटर जैसे डेटा विनिमय की व्यवस्था शामिल है। आईएमएफ के एक कार्य-पत्र में कहा गया कि भारत में तीनों तरह के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे मिलकर तमाम सार्वजनिक एवं निजी सेवाओं तक ऑनलाइन, कागज-रहित, नकदी-रहित और निजता को अहमियत देने वाली डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करते हैं।
आईएमएफ के मुताबिक, इस ढांचे में किए गए निवेश के लाभ देशभर में महसूस किए जा रहे हैं और इसने महामारी के दौर में भारत को खासी मदद पहुंचाई। आधार ने सरकारी खजाने से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी राशि पहुंचाकर सरकारी धन की बर्बादी रोकी, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई और अधिक परिवारों तक पहुंच बनाने का एक जरिया बना। भारत सरकार का अनुमान है कि मार्च, 2021 तक डिजिटल सार्वजनिक ढांचे की वजह से सकल घरेलू उत्पाद के करीब 1.1 प्रतिशत व्यय की बचत हो पाई। आईएमएफ कार्य-पत्र कहता है कि महामारी के शुरुआती दिनों में करीब 87 प्रतिशत परिवारों को कम-से-कम एक लाभ मिला था। इसके अलावा खाता एग्रिगेटर के जरिये वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान होने से करीब 45 लाख लोगों एवं कंपनियों को भी लाभ पहुंचा है। इसके मुताबिक, डिजिटलीकरण की प्रक्रिया ने अर्थव्यवस्था संगठित बनाने में मदद की है। जुलाई, 2017 से लेकर मार्च, 2022 के दौरान करीब 88 लाख नए करदाताओं के पंजीकृत होने से सरकारी राजस्व में भी वृद्धि हुई। इन तमाम खूबियों के बावजूद आईएमएफ का कार्य-पत्र भारत में डेटा सुरक्षा के बारे में एक समग्र कानून के अभाव का जिक्र करते हुए कहता है कि नागरिकों की निजता के संरक्षण और डेटा सेंधमारी की स्थिति में सरकार एवं कंपनियों को जवाबदेह ठहराने वाली एक सशक्त डेटा संरक्षण व्यवस्था जरूरी है।
