World Malaria Day 2018: मलेरिया फिलहाल देश के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है जिससे पार पाने के लिए हम आज भी सिर्फ कोशिश कर रहे हैं। एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक हर साल औसतन 18 लाख लोग मलेरिया के शिकार होते हैं लेकिन संसाधनों की कमी और मच्छरों की बढ़ती संख्या की वजह से हमारा देश मलेरिया से पूरी तरह से मुक्त नहीं हो पाया है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर घंटे तकरीबन 208 लोग मलेरिया के शिकार हो रहे हैं। मलेरिया एक गंभीर रोग है जिसका अगर सही समय पर इलाज न हो तो यह मरीज की जान भी ले सकती है।
कैसे जानलेवा हो जाता है मलेरिया – मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी है। मलेरिया के विषाणु से संक्रमित मच्छर जब किसी इंसान को काटते हैं तो मच्छरों के लार के साथ यह विषाणु उसके शरीर में पहुंच जाता है। रक्त के माध्यम से यह लीवर में जाकर परिपक्व होना शुरू हो जाता है। इसके बाद लीवर में काफी मात्रा में विषाणु बनने लगते हैं जिससे शरीर बीमार पड़ने लगता है। मलेरिया की शुरुआत में रोगी में दर्द के साथ बुखार, सिरदर्द, उल्टी या सूखी खांसी की शिकायत होती है। ऐसे लक्षण दिखने के बाद तुरंत खून की जांच करानी चाहिए जिससे मलेरिया की पुष्टि हो सके। इलाज में लापरवाही बरतने से रोगी कोमा में जा सकता है। या फिर उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
मलेरिया की वजह से मौत का एक प्रमुख कारण एनीमिया भी है जिसमें लाल रक्त कणिकाएं शरीर के हर भाग में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाती हैं। दरअसल, मलेरिया के संक्रमण के बाद शरीर में नई लाल रक्त कणिकाओं का बनना कम हो जाता है। लाल रक्त कणिकाएं शरीर के हर भाग में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए जानी जाती है। ऐसे में उनका निर्माण कम होने से शरीर के हर भाग में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता जिससे रोगी के मृत्यु की संभावना बनती है।
मलेरिया की वजह से रोगी के फेफड़ों को भी काफी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में उसे सांस लेने में काफी दिक्कत आती है। रोगी हर समय लंबी और गहरी सांस लेने की कोशिश करता है। मलेरिया के इस कंडीशन को रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस कहते हैं जो कि मलेरिया का एक गंभीर रूप है।
