World Blood Donor Day: वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार रक्तदान कई जिंदगियों को बचा सकती है। लेकिन ब्लड डोनेट करने से सिर्फ मरीज को ही नहीं, डोनर को भी फायदा होता है। बताया जाता है कि एक हेल्दी व्यक्ति हर तीन महीने पर रक्तदान कर सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्लड डोनेशन के करीब 21 दिनों के अंदर ही शरीर में रक्त की पूर्ति हो जाती है। हर साल 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है जिससे लोगों को इसके प्रति जागरुक किया जा सके। साथ ही लोगों को रक्त दान करने के लिए प्रेरित किया जा सके। आइए जानते हैं ब्लड डोनेट करने के 5 स्वास्थ्य फायदे –
वजन पर रहता है नियंत्रण: समय समय पर ब्लड डोनेट करने से वजन काबू में रहता है और स्वस्थ वयस्कों में फिटनेस बनी रहती है। एक शोध के मुताबिक करीब 450 एमएल ब्लड डोनेट करने से 650 कैलोरीज बर्न होता है। हालांकि, रक्तदान से पहले अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। साथ ही, वेट लॉस प्लान के तहत ब्लड डोनेट न करें।
कम होता है हेमोक्रोमेटोसिस का खतरा: विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड डोनेट करने से शरीर में आयरन के ज्यादा सोखने का खतरा कम होता है। रक्तदान शरीर में आयरन का ओवरडोज नहीं होने देता है जिससे हेमोक्रोमेटोसिस का खतरा कम होता है।
हृदय रोग का खतरा होगा कम: नियमित रूप से ब्लड डोनेशन करने पर शरीर में आयरन लेवल संतुलित रहता है जिससे हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है। बता दें कि शरीर में ज्यादा आयरन जमा होने पर ऑक्सिडेटिव डैमेज हो सकता है जिसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावनाएं बढ़ती हैं।
कम होगा कैंसर का जोखिम: बताया जाता है कि बॉडी में ज्यादा आयरन हो जाने से कैंसर को बुलावा मिलता है। रक्तदान करने से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है जिससे कैंसर सेल्स के विकसित होने का खतरा कम हो जाता है।
नए ब्लड सेल्स विकसित होंगे: रक्तदान नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बेहतर करता है। ब्लड डोनेट करने के बाद बोन मैरो की मदद से 48 घंटे के अंदर नई ब्लड सेल्स का उत्पादन शुरू हो जाता है। करीब एक से दो महीनों के बीच जितने भी लाल रक्त कोशिकाएं (रेड ब्लड सेल्स) निकल जाती हैं, वो दोबारा बनने लगते हैं।
