Uric Acid in Women: आज की बदलती जीवन-शैली में लोग कम उम्र में ही कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। गलत खान-पान और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही करने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, महिलाओं में मासिक धर्म बंद होने यानि कि मेनोपॉज के बाद कई बीमारियों से घिरने का खतरा अधिक होता है। शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता इन्हीं परेशानियों में से एक है। हाई यूरिक एसिड के मरीजों को जोड़ों में दर्द, हाथ-पैर में सूजन और उठने बैठने में दिक्कत होती है। शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से गठिया जैसी बीमारी का खतरा भी बढ़ता है। आइए जानते हैं मेनोपॉज के बाद महिलाएं खुद को कैसे रख सकती हैं सुरक्षित-
मेनोपॉज और हाई यूरिक एसिड: एक शोध के अनुसार मेनोपॉज से पहले हाई यूरिक एसिड होने की परेशानी 50 महिलाओं में देखी गई जबकि माहवारी के खत्म हो जाने के बाद ये आंकड़ा 88 हो जाता है। वहीं, इससे ये भी पता चलता है कि यूरिक एसिड की अधिकता से दिल की बीमारी का खतरा भी बढ़ता है। मेनोपॉज के बाद शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते हैं। इस दौरान जो महिलाएं शारीरिक रूप से सुस्त होती हैं, उनमें किसी भी बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि फिजिकल इनैक्टिविटी के कारण उनका मेटाबॉलिक रेट कम हो जाता है। ऐसे में अगर शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को कंट्रोल न किया जाए तो ये अर्थराइटिस का रूप भी ले सकता है।
ऐसे करें बचाव: मासिक धर्म के बंद होने के बाद शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता न हो इसके लिए महिलाओं को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें अपनी डाइट में कम मात्रा में हाई प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। बता दें कि शरीर में प्यूरीन नामक प्रोटीन के ब्रेकडाउन होने पर ही ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ता है। ऐसे में महिलाओं को अपने आहार में उन खाद्य पदार्थों को शामिल करने से बचना चाहिए जिनमें प्यूरीन की मात्रा अधिक हो। इसके अलावा, फाइबर व एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाने को अधिक महत्व देना चाहिए।
फिट रहने के लिए करें व्यायाम: एक अध्ययन के अनुसार मेनोपॉज के बाद जो महिलाएं शारीरिक रूप से एक्टिव रहती हैं उनमें कोई भी बीमारी होने का खतरा कम रहता है। वहीं, सुस्त महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से अधिक परेशान रहती हैं। यूरिक एसिड की अधिकता को कम करने में व्यायाम करना भी फायदेमंद हो सकता है। योग करने से आप एनर्जेटिक तो महसूस करेंगे ही, साथ ही हाथ, पैर व बाजुओं की मांसपेशियों मजबूत होती हैं। इससे जोड़ों के दर्द और हाथ-पैर में सूजन से भी राहत मिलती है। कपोतासन, वृक्षासन और उष्ट्रासन जैसे योगासन को करने से मदद मिलेगी।
