विटामिन-डी की कमी आज के नए जमाने की बीमारी है, जिसके कारण आज ज्यादातर शहरी लोग चक्कर आने और कमर, पैर-हाथ, कंधे के दर्द से परेशान है। वैज्ञानिकों ने विटामिन-डी की कमी की पहचान हृदय के स्वास्थ्य को निर्धारित करने वाले कारक के रूप में की है। अब भारतीय शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि विटामिन-डी की कमी से होने वाले इंसुलिन प्रतिरोध की वजह से दिल का दौरा पड़ सकता है।

शरीर में विटामिन-डी का उत्पादन करने के लिए हर रोज धूप की खुराक हड्डियों की मजबूती के साथ-साथ हृदय को सेहतमंद रखने में भी मददगार हो सकती है। एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि हृदय को स्वस्थ रखने में भी विटामिन-डी महत्त्वपूर्ण हो सकता है। शरीर में विटामिन-डी की कमी से हड्डियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। फरीदाबाद स्थित ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान ने यह अध्ययन किया है और यह शोध ‘मॉलिक्यूलर न्यूट्रीशन एंड फूड रिसर्च’ नामक जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

शोध के मुताबिक, इंसुलिन रक्त में उपस्थित शर्करा को ऊर्जा में परिवर्तित करने के साथ शरीर में कई ऊतकों में कोशिकीय चयापचय के नियमन में भी भूमिका निभाता है। हृदय कोशिकाओं में इंसुलिन प्रतिरोध के कारण हृदय में ग्लूकोज और वसा अम्ल जैसे ऊर्जा उत्पादकों का उपयोग बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। विटामिन-डी की कमी का अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग किया है। उन्होंने चूहों के तीन समूह बनाए और इन समूहों को अलग-अलग तीन प्रकार के आहार दिए।

इनमें एक समूह को पर्याप्त विटामिन-डी, दूसरे को विटामिन-डी की कमी और तीसरे को उच्च वसा और उच्च फ्रुक्टोज वाला भोजन दिया गया। बीस सप्ताह बाद पाया गया कि जिन चूहों को विटामिन-डी की कमी वाला आहार दिया गया था, उनका दिल काम नहीं कर रहा था। इन चूहों के हृदय में कुछ उसी तरह के आणविक और कार्यात्मक बदलाव देखे गए जो अधिक वसा और उच्च फ्रूक्टोज युक्त आहार का सेवन करने वाले चूहों में पाए गए थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि केवल विटामिन-डी की कमी के कारण होने वाला हृदय संबंधी विकार और उच्च कैलोरी आहार जैसे अन्य जोखिम कारकों के कारण होने वाले विकार बिल्कुल समान थे। वहीं कुछ मापदंडों में इसका प्रभाव अधिक पाया गया। हृदय की दीवार की मोटाई, हृदय-कक्षों के आंतरिक व्यास और हृदय की संकुचन क्षमता द्वारा इन निष्कर्षों की पुष्टि हुई है।

फरीदाबाद स्थित ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई) के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. संजय कुमार बनर्जी ने बताया कि हमने विटामिन-डी की कमी और हृदय संबंधी विकारों के बीच की कड़ी का पता लगाया है और जानने का प्रयास किया है कि यह कैसे हार्ट फेल होने का कारण बन सकती है। विटामिन-डी और इसकी संकेतक प्रक्रिया दिल के पेशीय ऊतकों से संबंधित इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित करती है। इंसुलिन की कमी होने से ग्लूकोज के ऊर्जा में परिवर्तित होने का क्रम टूट जाता है और हार्ट फेल होने की स्थिति बनने लगती है। उनका कहना है कि यह शोध शरीर में विटामिन-डी ग्राहियों की सक्रियता को ध्यान में रखते हुए हार्ट फेल होने को नियंत्रित करने के लिए नई दवाएं तैयार करने में सहायक हो सकता है।