डायबिटीज के रोगियों के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। देश में बहुत से लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। अब तो यह बीमारी बच्चों में भी काफी मात्रा में देखने को मिल रही है। बच्चों में डायबिटीज की यह बीमारी काफी घातक असर डाल सकती है। इससे उनकी आंखों और किडनियों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। डायबिटीज से पीड़ित बच्चों में कुछ खास लक्षण दिखाई पड़ते हैं। इसकी मदद से रोग की पहचान कर समुचित इलाज कराया जा सकता है। आइए, जानते हैं कि वे लक्षण कौन-कौन से हैं।
बार-बार प्यास लगना – बच्चों में शुगर लेवल की मात्रा बढ़ जाने से उन्हें बहुत ज्यादा प्यास लगती हैं। इसके अलावा उनको कोलड्रिंक और जूस जैसी लिक्विड चीजें पीने की भी इच्छा होती हैं। अगर आपके बच्चे में भी कुछ ऐसे लक्षण दिख रहें हैं तो आप सतर्क हो जाएं।
बार-बार भूख लगना – डायबिटीज शरीर में ऊर्जा की कमी का कारण है। यह बच्चों की भूख को बढ़ा देती है और वो जरूरत से ज्यादा खाना खाने लगते हैं। ज्यादा खाना खाने के बावजूद भी उनका वजन बढ़ने की बजाय कम होने लगता हैं।
थकान रहना – डायबिटीज के कारण इन्सुलिन की मात्रा घट जाती है। जिससे बच्चों के शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। इससे बच्चे बिना कुछ किए थक जाते हैं। वो सुस्त हो जाते हैं और उनका खेलने का भी मन नहीं करता है।
यीस्ट संक्रमण- डायबिटीज की वजह से छोटी बच्चियों में यीस्ट संक्रमण भी हो सकता है। यहां तक कि जो शिशु डायपर पहनते हैं उन्हें भी ईस्ट की वजह से घाव हो सकते हैं।
मूड में बदलाव – बच्चों और लड़कियों में टाइप 1 डायबिटीज होने की संभावना अधिक होती है। टाइप 1 डायबिटीज मेलिटस से ग्रस्त बच्चों को देखने में तकलीफ होती है। इससे बच्चों को धुंधला दिखाई देता है। टाइप 1 डाइबिटीज मेलिटस से ग्रस्त बच्चों के व्यवहार में अचानक परिवर्तन आ जाता है। वे अचानक चिड़चिड़े, मूडी, क्रेंकी और उदास हो जाते हैं।
डायबिटीज में परहेज और खास देखभाल की जरूरत होती हैं। पोषक तत्वों की कमी के कारण डायबिटीज की समस्या होती है। ऐसे में बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर हरी सब्जियां, हेल्दी भोजन और फल आदि का सेवन कराते रहना चाहिए।
