स्टेम सेल ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता मिलती है। इसके साथ ही ये अन्य किसी भी प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती है। वैज्ञानिकों की माने तो स्टेम सेल के जरिए किसी भी कोशिकाओं को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी खोज साल 1960 में कनाडा के वैज्ञानिकों अर्नस्ट.ए.मुकलॉक और जेम्स. ई. टिल ने की थी, जिसके बाद स्टेम कोशिका के इस्तेमाल को बढ़ावा मिला है। भारत में भी स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जाने लगा है। स्टेम सेल का इस्तेमाल डायबिटीज, अर्थराइटिस, दिल की बीमारी और बाकी कई खतरनाक बीमारियों में किया जा सकता है। आइए जानते हैं स्टेम सेल से इलाज कैसे होता है।

स्टेम सेल ट्रीटमेंट: स्टेम सेल्स ऐसी अविकसित कोशिका हैं जिनमें विकसित कोशिका के रूप में विशिष्टता अर्जित करने की क्षमता होती है। इसी से क्लोनिंग और जैव प्रोद्योगिकी के क्षेत्र का विकास भी हुआ है जिसे कोशिका चिकित्सा कहते हैं। इन कोशिकाओं का इस्तेमाल स्वस्थ कोशिकाओं को विकसित करने के लिए किया जाता है। दरअसल, अधिक्तर स्टेम सेल कोशिकाएं भ्रूण से प्राप्त होती हैं, जिन्हें जन्म के समय ही सुरक्षित रखना होता है। हालांकि बाद में हुए किसी छोटे भाई या बहन के जन्म के समय सुरक्षित रखीं कोशिकाएं भी सहायक सिद्ध हो सकती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि वयस्क स्टेम कोशिकाओं का मनुष्य में सुरक्षित प्रयोग लगभग 30 वर्षो के लिए किया जा सकता है। रोगी के ही बोन मेरो से स्टेम सेल को लेकर इलाज किया जाता है। इससे बाहर के किसी वायरस या बीमारी होने का खतरा नहीं रहता और शरीर भी आसानी से स्टेम सेल को अपना लेता है। इससे रोगी को कोई नुकसान नहीं होता।

इन रोगों के लिए कारगर है स्टेम सेल: दिल की बीमारी, डायबिटीज, न्यूरोमस्कलर रोग, अर्थराइटिस, दिमागी चोट, डायस्ट्रोफी, एएलएस और अल्जाइमर जैसे रोगों के लिए स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा एप्लास्टिक एनीमिया की कमी और थैलीसीमिया का स्टेम कोशिका तकनीक से उपचार संभव है।