Liver Disease Symptoms on Feet: हमारा लीवर शरीर का एक ऐसा महत्वपूर्ण अंग है जो बिना रुके लगातार अपना काम करता रहता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने, फैट को पचाने, हार्मोन संतुलन बनाए रखने और ऊर्जा उत्पादन जैसे 500 से अधिक जरूरी कार्य करता है। लेकिन जब लीवर ठीक से काम करना बंद करता है, तो इसके शुरुआती संकेत शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दिखने लगते हैं। खास बात यह है कि लीवर की गड़बड़ी के कुछ अहम लक्षण पैरों में भी नजर आ सकते हैं, जिन्हें अक्सर लोग मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं।
आमतौर पर पैरों में सूजन, दर्द या त्वचा में बदलाव लंबे समय तक खड़े रहने, गलत जूते पहनने या ज्यादा चलने की वजह से भी हो सकती हैं। लेकिन अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो यह लीवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकते हैं। Journal of Hepatology के अनुसार पोर्टल हाइपरटेंशन के कारण पैरों की नसों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे तरल पदार्थ का रिसाव होता है। यह अक्सर एडवांस लिवर डिजीज का प्रारंभिक बाहरी लक्षण होता है।
लिवर में खराबी होने के लक्षण
लिवर में खराबी होने पर शरीर में कमजोरी, भूख न लगना, उल्टी, नींद की कमी, दिनभर थकान, सुस्ती और अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। Journal of Gastroenterology में प्रकाशित शोध के अनुसार, फैटी लिवर से जूझ रहे 50-80% मरीज थकान की शिकायत करते हैं। Diabetes Care जर्नल के अनुसार, फैटी लिवर का सीधा संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस से है। लिवर में फैट जमा होने से शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसके लक्षण गर्दन के पीछे, बगल या कोहनी पर काले, मखमली धब्बे के रूप में दिखाई देते हैं। यह लिवर में मेटाबॉलिक गड़बड़ी का एक बड़ा संकेत है। डॉ. एरिक बर्ग के मुताबिक जब लीवर सही तरीके से काम नहीं करता तो पैरों में कुछ खास बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही प्रमुख संकेतों के बारे में।
पैरों पर लाल या भूरे रंग के धब्बे होना
अगर घुटनों के नीचे या पैरों के ऊपरी हिस्से में लाल या भूरे रंग के निशान दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लीवर में फैट जमा होने या लीवर की कार्यक्षमता घटने पर ऐसे धब्बे उभर सकते हैं, जो दिखने में चकत्तों जैसे होते हैं।
टखनों और पैरों पर जाले जैसी नसें
पैरों या टखनों पर पतली, जाले जैसी नसें दिखाई देना भी लीवर की समस्या का संकेत हो सकता है। लिवर सिरोसिस जैसी स्थिति में हार्मोन असंतुलन हो जाता है, जिससे नसें फैलने लगती हैं और स्पाइडर वेन्स बनने लगती हैं।
एड़ियों का बार-बार फटना
फटी एड़ियां केवल स्किन केयर की कमी का ही नहीं, बल्कि लीवर की खराबी का भी संकेत हो सकती हैं। लीवर की समस्या होने पर शरीर में विटामिन A, D, E और K जैसे फैट-सॉल्युबल विटामिन्स का अवशोषण कम हो जाता है। खासकर विटामिन A की कमी से त्वचा रूखी, मोटी और फटी हुई हो सकती है।
पैरों में जलन या असामान्य गर्माहट
रात के समय पैरों के तलवों में जलन या गर्मी महसूस होना केवल थकान या नसों की कमजोरी का कारण नहीं होता। लीवर के खराब होने पर शरीर से टॉक्सिन बाहर नहीं निकल पाते, जिससे खून में अमोनिया जैसे तत्व बढ़ जाते हैं। ये नसों को प्रभावित कर पैरों में जलन और झनझनाहट पैदा कर सकते हैं।
पैरों और टखनों में सूजन
अगर पैरों या टखनों में सूजन आ जाए और उंगली से दबाने पर कुछ देर तक गड्ढा बना रहे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। लीवर डैमेज की स्थिति में एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन की कमी हो जाती है, जिससे शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसका असर सबसे पहले पैरों में सूजन के रूप में दिखाई देता है।
पैरों से तेज और असामान्य बदबू
पैरों की बदबू आमतौर पर पसीने और बैक्टीरिया की वजह से होती है, लेकिन लिवर की बीमारी में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है। जब लिवर विषैले तत्वों को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाता, तो ये पसीने के जरिए शरीर से निकलने लगते हैं। इससे पैरों से आने वाली दुर्गंध सामान्य से ज्यादा तेज और अलग महसूस हो सकती है।
कब सतर्क होना जरूरी है
अगर पैरों में बताए गए लक्षण लंबे समय तक बने रहें और इनके साथ कमजोरी, थकान, भूख न लगना या वजन तेजी से घटने जैसी समस्याएं भी हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय रहते जांच और सही इलाज से लीवर की गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष
पैर हमारे शरीर का वह हिस्सा हैं, जो कई बार अंदरूनी बीमारियों के संकेत पहले ही दे देते हैं। इसलिए पैरों में होने वाले लगातार बदलावों को हल्के में न लें। सही समय पर पहचान और इलाज लीवर को गंभीर नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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