तुलसी की पत्तियां कई तरह के रोगों के उपचार में काम आती हैं। आयुर्वेद में इसके बहुत से लाभ बताए गए हैं। आयरन से भरपूर तुलसी की पत्तियों से तमाम असाध्य रोगों के भी उपचार की बात आयुर्वेद में कही गई है। लेकिन ज्यादा मात्रा में तुलसी का सेवन सेहत के लिए हानिकारक भी हो सकता है। दांतों के लिए गर्भवती महिलाओं के लिए तथा डायबिटीज रोगियों के लिए तुलसी की पत्तियां नुकसानदेह हो सकती हैं। तो चलिए, जानते हैं कि तुलसी की पत्तियों के और क्या-क्या साइड इफेक्ट होते हैं।
रक्त का थक्का बनने में परेशानी – तुलसी में एंटी-क्लॉटिंग गुण होता है। इस वजह से अधिक मात्रा में तुलसी का सेवन करने से खून पतला हो जाता है और रक्त का थक्का बनने में परेशानी होती है। ऐसे में अगर आपको पहले से ही खून का थक्का ना बनने की परेशानी है तो आपको डॉक्टर की सलाह लेकर ही तुलसी का सेवन करना चाहिए।
गर्भावस्था में हानिकारक – तुलसी का अत्यधिक सेवन करना गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकता है। तुलसी में एंटी-क्लॉटिंग गुण होता है जिससे तेजी से रक्त का थक्का नहीं बन पाता और प्रसव या सर्जरी के दौरान महिलाओं को अधिक रक्तस्राव जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक तुलसी के सेवन से बचना चाहिए।
दांतों के लिए नुकसानदेह – तुलसी में आयरन होता है जो कि दांतों को दागदार बना देता है। हालांकि इससे दांत खराब नहीं होते हैं लेकिन उनकी प्राकृतिक चमक खत्म हो जाती है। इसलिए तुलसी को चबाने के बजाय आप इसका रस पीने की कोशिश करें।
डायबिटीज रोगियों के लिए हानिकारक – अगर आप डायबिटीज के उपचार के लिए दवाएं खा रहे हैं तो आपको डॉक्टर के परामर्श के बिना तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए। तुलसी का सेवन करने से खून में शुगर का स्तर कम हो जाता है। ऐसी स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। शरीर के किसी अंग का कांपना, चक्कर आना और जलन जैसी समस्या होना हाइपोग्लाइसीमिया का लक्षण है। ऐसे में डायबिटीज रोगियों को तुलसी के सेवन से परहेज करना चाहिए।
पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए हानिकारक – तुलसी के अधिक सेवन से पुरुषों की प्रजनन शक्ति प्रभावित हो सकती है। खरगोशों पर किए गए एक परीक्षण में यह बात सामने आई है। परीक्षण में खरगोशों को 30 दिनों तक दो ग्राम तुलसी के पत्ते खाने के लिए दिए गए थे। जिसके बाद उनके शुक्राणुओं की संख्या में काफी कमी देखी गई।
