Iodine Deficiency: शरीर में सभी पोषक तत्वों का होना जरूरी है, किसी की भी कमी से इंसान बीमार पड़ सकता है। इन्हें प्राप्त करने का सबसे बेहतर तरीका है बैलेंस्ड डाइट लेना जिसमें तकरीबन सभी न्यट्रिएंट्स से भरपूर फूड्स शामिल होते हैं।
आयोडीन भी एक ऐसा ही जरूरी पोषक तत्व है जो थायरॉयड के फंक्शन को नियमित रखने में मदद करता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि थायरोक्सिन हार्मोन को सिंथेसाइज करने के लिए थायरॉयड ग्लैंड को आयोडीन की जरूरत पड़ती है। कई शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि शरीर में कुछ मात्रा में भी अगर आयोडीन की कमी होती है तो ये थायरॉयड संबंधित परेशानियों को बढ़ा सकती हैं।
सिर्फ यही नहीं, इसकी कमी से दिमाग से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। कमजोर इम्युनिटी, डिप्रेशन, हार्ट फेलियर, विकलांगता, मंद-बुद्धि, शारीरिक विकास में रुकावट जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं, महिलाओं में इस वजह से गर्भपात या बांझपन की परेशानी देखने को मिलती है। एक रिपोर्ट के अनुसार आयोडीन की कमी की वजह से महिलाओं की गर्भधारण करने की संभावना 46 प्रतिशत तक कम हो जाती है।
क्या हैं आयोडीन की कमी के लक्षण: कमजोरी, ज्यादा ठंड लगना, वजन में अधिकता, थकान महसूस होना आयोडीन की कमी की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, ड्राय स्किन, बालों का झड़ना, भ्रम की स्थिति, गले में सूजन, अवसाद, याद्दाश्त कमजोर होना, अनियमित मासिक धर्म गर्भावस्था में जटिलता, दम घुटना और अधिक नींद आना भी इस पोषक तत्व की कमी का लक्षण हो सकता है।
कितने मात्रा में आयोडीन का सेवन है जरूरी: एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक हेल्दी वयस्क को नियमित रूप से हर दिन करीब 150 माइक्रोग्राम आयोडीन का सेवन करना चाहिए। वहीं, गर्भावस्था में इसकी मात्रा को बढ़ा दें। इस वक्त महिला के शरीर के साथ ही शिशु के विकास के लिए भी आयोडीन जरूरी है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को दैनिक रूप से रोजाना करीब 220 से 290 माइक्रोग्राम आयोडीन का सेवन करना चाहिए।
कैसे करें इसकी कमी को दूर: आयोडीन युक्त नमक, पनीर, दूध और दही को आयोडीन का प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। इसके अलावा, जो लोग आयोडीन की कमी से जूझ रहे हैं उन्हें अपनी डाइट में आलू, तुर्की, श्रींप, मध्यम आकार के केले और स्ट्रॉबेरी को शामिल करना चाहिए।
