सर्दियां आ चुकी है और सर्द मौसम ने अपना असर दिखाना भी शुरू कर दिया है। अब इस मौसम में खाने पीने का ध्यान रखना भी बहुत जरुरी है। आपने देखा होगा कि सर्दियों में अधिकतर लोग जोड़ों के दर्द या अर्थराइटिस से परेशान रहते हैं। कई कोशिश करने के बाद भी यह दर्द ठीक नहीं होता है और लोगों को इसका दर्द झेलना पड़ेगा। आइए आज हम आपको इसका एक देसी इलाज बता रहे हैं, जिससे कि आप कुछ ही दिनों में इसके दर्द से निजात पा सकते हैं।
बता दें कि एक चौथाई कप (36 gms) तिल में 200 कैलोरी और 351 एमजी कैल्शियम होता है। इसके अलावा तिल में लो ग्लिसेमिक इंडेक्स होने के कारण ये डायबिटीज वाले भी ले सकते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि तिल गर्मी पैदा करने वाला फूड है इसलिए ये वात-दोष को संतुलित रखने में मदद करता है जो ऑस्टियोपोरोसीस के खतरे को बढ़ाने के साथ-साथ हड्डियों से संबंधित बीमारी लो बोन डेन्सिटी और बोन लॉस संबंधित समस्याओं का कारण होता है। गर्मी के मौसम में आप एक चम्मच सफेद तिल को थोड़े-से पानी में भिगोकर रात भर पानी में रख दें और सुबह इसके सेवन से हड्डी और अस्थि मज्जा को मजबूती मिलती है। जबकि जाड़े के मौसम में हर दिन एक छोटा चम्मच तिल धीरे-धीरे चबाकर खायें इससे आपको फायदा जरूर मिलेगा। अगर आप इसको कच्चा नहीं खा पा रहे हैं तो इसके साथ गुड़ मिलाकर लड्डू या चक्की बनाकर खा सकते हैं।
अगर आपको जोड़ों में असहनीय दर्द हो रहा है तो आप तिल के तेल से मसाज कर सकते हैं इससे वात दोष भी कम होता है। लेकिन यदि आपके शरीर को कफ दोष है तो तिल का तेल आपके लिए सही नहीं होगा इसके लिए आप रोज नियम करके दूध पियें इससे शरीर को कैल्शियम की ज़रूरत पूरी होने के साथ-साथ अस्थि मज्जा को भी मजबूती मिल जाती है। कफ दोष वाले शरीर के लिए आप केसर, खजूर, बादाम के साथ ले सकते हैं या इलायची, दालचीनी, अदरक या हल्दी का जड़ भी मिला सकते हैं। जिन लोगों को ऑस्टियोपोरोसीस होता है वे अपने डायट में तिल के साथ आप हरी सब्जियों में पालक, शलगम के साथ आप होल ग्रेन, फोर्टीफाइड ओट मील, ब्रोक्ली, बंदगोभी, स्प्राउट, बीन्स, उड़द और काबुली चना ले सकते हैं।

