Irregular Periods: पीरियड्स के दौरान न केवल दर्द बल्कि महिलाओं को असुविधा भी हो जाती है। आमतौर पर 13 वर्ष या उससे अधिक उम्र की लड़कियों को पीरियड्स यानी कि माहवारी शुरू हो जाते हैं। ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो लगभग 45 से 50 की उम्र में बंद हो जाती है। 3 से 6 दिनों तक चलने वाले इस साइकिल के दौरान महिलाओं को कई तरह की दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है जिसमें पेट में दर्द मुख्य रूप से शामिल है। महिलाओं में कई बार जब स्ट्रेस लेवल बढ़ता है तो इसका असर उनके मेन्सट्रुअल साइकिल यानि कि माहवारी के समय पर भी पड़ता है। तनाव के बढ़ने से युवतियों व महिलाओं को अनियमित पीरियड्स की शिकायत हो जाती है।
माहवारी के अनियमित होने से न केवल महिलाएं असहज हो जाती हैं बल्कि उनमें कई बीमारियों से पीड़ित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रेगुलर पीरियड्स के लिए युवतियों को दवाइयों की जगह हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना चाहिए।
डेली रूटीन में लाएं ये बदलाव: माहवारी नियमित और समय पर रहे इसके लिए जरूरी है कि युवतियां व महिलाएं अपनी दिनचर्या में कुछ जरूरी बदलाव लेकर आएं। विशेषज्ञों के मुताबिक पीरियड्स समय पर आना इस बात पर भी निर्भर करता है कि शरीर कितना स्वस्थ है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपनी सेहत के प्रति सतर्क हो जाएं और निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें।
स्वस्थ खानपान
पाचन तंत्र को सेहतमंद रखें
तनाव कम करें
भरपूर पीयें पानी
नियमित एक्सरसाइज
योग, प्राणायाम और ध्यान
शरीर में विटामिन-डी की पूर्ति
इनका इस्तेमाल भी फायदेमंद: दशांग एक आयुर्वेदिक धूप यानि कि सुगंध पहुंचाने वाली औषधि है। चंदन, जटामानसी और कई अन्य सुगंधित जड़ी-बूटियों के मिश्रण से ये बनता है। इसका उपयोग करने से मस्तिष्क शांत हो जाता है। इसके अलावा, दशांग धूप को यूज करने से हवा भी शुद्ध होता है और इससे सकारात्मक वास्तु ऊर्जा भी घर में आती है।
दर्द निवारण के घरेलू उपाय: पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पेट में दर्द और ऐंठन ही समस्या भी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दर्द से पीछा छुड़ाने में दवाइयों का इस्तेमाल असरदार तो है, मगर हार्मोन्स को भी प्रभावित करता है। ऐसे में घरेलू उपायों का उपयोग उत्तम साबित होता है। मासिक धर्म के दौरान महिलाएं अदरक-पानी, अजवायन का काढ़ा, सूखे मेवे और डार्क चॉकलेट्स का सेवन कर सकती हैं।
