जिन बच्चों को डायबिटीज होती है उनके पेरेंट्स और उनके लिए यह परेशानी के साथ-साथ एक फुल टाइम जॉब होता है। ब्लड शुगर चेक करना, इन्सुलिन का ध्यान रखना, दवाई समय पर देना ये उनकी दिनचर्या में शामिल हो जाते हैं। एक परिवार के लिए बच्चे की डायबिटीज का ध्यान रखना एक बड़ी जिम्मेदारी का काम होता है। आज तकनीक के समय में ब्लड शुगर को नापना तो आसान हो गया है, लेकिन उसे नियंत्रित करना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन अगर कुछ बातों पर विशेष ध्यान दिया जाए तो शुगर नियंत्रित हो सकती है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो यह एक बड़ी बीमारी का रूप धारण कर सकती है।

एक्सरसाइज करने से ब्लड शुगर में कमी आती है वहीं, रेगुलर एक्टिविटिज से भी इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। इन्सुलिन को कंट्रोल में रखने के लिए बच्चे को अपने पास शुगर क्यूबस, टॉफी या कुछ मीठा रखना चाहिए, जिससे कभी ब्लड शुगर कम होने पर उसे संतुलित किया जा सकता है।

जो बच्चे मोटापे और डायबिटीज से ग्रसित हैं, उन बच्चों के बचपन के लिए यह खतरे की घंटी है। ज्यादा वजन होने की वजह से भागने दौड़ने में उन्हें तकलीफ होती है इसलिए वो बाहर जाकर नहीं खेलते हैं। शुगर की बीमारी जेनेटिक भी होती है। दो तरह की डायबिटीज हम लोगों में ज़्यादातर देखते हैं, जिसमें एक ग्रुप 40 साल से ज्यादा लोगों का होता है और दूसरा ग्रुप 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों का होता है। यह बीमारी आजकल खान पान की आदतों और शाररिक रूप से कम काम करने की वजह से बढ़ी हैं। पिछले दो दशकों में बच्चों में मोटापे की समस्या 25 प्रतिशत तक बढ़ी है। इससे बचने का सिर्फ एक तरीका है कि अपने बच्चों के खान-पान का विशेष ध्यान रखें और उन्हें फिजिकल वर्क आउट करने के लिए प्रोत्साहित करें। कई बार मोटापे की वजह से भी शुगर हो जाती है।