नोएडा के अट्टा चौक पर बिकने वाले छोटे समोसे अंकित को बहुत पसंद है। दस रुपए का नोट दिया और अखबार के टुकड़े पर समोसे को चाकू से काट कर लहसुन धनिया की चटनी के साथ ले लिया। इसी तरह गृहिणी वीणा भी घर में जब पकौड़े तलती हैं तो तेल सुखाने के लिए पहले उसे अखबार पर रखती हैं।  बहुत से ऐसे लोग हैं जो दफ्तर में ले जाने के लिए रोटियों को अखबार में लपेटते हैं। ट्रेनों और बसों में सफर के दौरान भी अखबार को थाली बनाना बहुतों को पसंद है। लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इस नुकसान की पुष्टि की है देश के खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआइ ने।

एफएसएसएआइ ने खाने की चीजों को अखबार में रखने, पैक करने या रखकर खाने के प्रति लोगों को आगाह किया है और इसे खतरनाक व जहरीला बताया है। नियामक संस्था का कहना है अखबारों में रखे खाने के जरिए लोगों के शरीर में कैंसर जैसे रोग के कारक तत्त्व पहुंच रहे हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकार (एफएसएसएआइ) ने इस बारे में एक परामर्श जारी किया है। इसमें कहा गया है, ‘खाने या खाद्य पदार्थों को अखबारों में रखना या लपेटना अस्वास्थ्यकारी है और इस तरह के खाद्य उत्पाद या खाना खाना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है भले ही उक्त खाना कितना अच्छा बना हो’। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने एफएसएसएआइ से कहा था कि वह इस बारे में परामर्श जारी करे।

नियामक संस्था की परामर्श में कहा गया है कि चूंकि अखबार छापने वाली स्याही में अनेक खतरनाक बायोएक्टिव तत्त्व होते हैं जिनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी सभी को है। इसके साथ ही प्रकाशन स्याही में हानिकारक रंग, पिगमेंट व परिरक्षक आदि हो सकते हैं। इसमें कहा गया है कि बुजुर्गों, किशोरों, बच्चों व किसी रोग से पीड़ित लोगों को अखबारों में खाना देना खतरनाक हो सकता है। एफएसएसएआइ ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों से कहा है कि वे इस बारे में लोगों को जागरूक करें।