Strong Gut: रोज हेल्दी खाने वाले लोग भी त्योहारों के मौके पर अपनी डाइट को लेकर ढिलाई बरत ही देते हैं। पर्व-त्योहारों में जंक फूड, मिठाई और ऑयली फूड खाने से पेट भारी होने लगता है। ऐसे कई बार शाम होने तक न केवल आपका शरीर थक जाता है, बल्कि पेट में दर्द, दस्त या फिर पेट फूलने की समस्या भी हो जाती है। होली बीतने के बाद अगर आपको भी ये परेशानी महसूस तो चिंता करने की बजाय घरेलू नुस्खों को आजमाएं। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स से कि त्योहारों के बाद क्या खाने से पेट ठीक रहेगा –

आंतों का ठीक होना क्यों जरूरी है: आपका आंत और मस्तिष्क लाखों तंत्रिका कोशिकाओं से जुड़े होते हैं और आंत को अक्सर अच्छे कारण के लिए दूसरा मस्तिष्क कहा जाता है। आंत के खराब होने से लोग अवसाद या चिंता से ग्रस्त हो जाते हैं। इससे शारीरिक ही नहीं, लोगों की मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है। गट यानी आंत में सेरोटोनिन हार्मोन निकलता है। शरीर में इस हार्मोन की कमी से कम ब्लड शुगर की परेशानी हो सकती है।

सिर्फ इतना ही नहीं, किसी भी व्यक्ति का इम्युन सिस्टम आंत पर 80 फीसदी निर्भर है। इसमें मौजूद बैक्टीरिया भोजन को पचाने में मदद करते हैं। साथ ही, सेरोटोनिन के उत्पादन और इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि आंत इतनी नाजुक होती है कि ज्यादा मीठा, सब्जियों में मौजूद पेस्टिसाइड्स, यहां तक कि दवाओं के उपयोग से भी शरीर का ये अंग प्रभावित होता है।

क्या खाने से मजबूत होगी आंत: हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आंत को स्वस्थ रखने के लिए लोगों को कुछ खास खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

लहसुन: लहसुन को एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर माना जाता है। ये संक्रमण से लड़ने में मददगार साबित होता है। इन्हें कच्चा खाने से इसमें मौजूद एंजाइम्स शरीर में जीवित रूप में प्रवेश करते हैं। वहीं, अगर आपको इसका स्वाद पसंद न हो तो आप लहसुन से बने कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं।

कच्चा केला: हरे केलों में फाइबर रेसिसटेंस स्टार्च पाया जाता है जिसे खाने से आंतों में मौजूद भोजन को पचाने वाले बैक्टीरिया को मजबूत करते हैं। इसे प्रीबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है।

सेब का सिरका: पेट में एसिड की मात्रा कम होने से पैथोजेंस को पैर पसारने का मौका मिलता है। ऐसे में सेब का सिरका लेने से पाचन संबंधी दिक्कतें दूर होती हैं। खाने को पचाने में मदद मिलती है, शरीर डिटॉक्स होता है और बॉडी में pH का स्तर भी बेहतर होता है।