World Thyroid Day 2020: खराब जीवन-शैली और अनहेल्दी खानपान के कारण आज के समय में थायरॉयड की बीमारी बहुत ही आम बन चुकी है। पहले थायरॉइड को बढ़ती उम्र में होने वाली बीमारियों में गिना जाता था लेकिन अब युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। थायरॉयड ग्लैंड गर्दन में एडम्स ऐप्पल के पास होती है, जिससे थायरॉक्सिन नामक हार्मोन निकलता है। ये हार्मोन शरीर की एक्टिविटीज को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति में थायरॉयड ग्लैंड ज्यादा या कम मात्रा में ये हार्मोन पैदा करने लगता है तो उस स्थिति को थायरॉयड कहते हैं। इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 25 मई को वर्ल्ड थायरॉयड डे मनाया जाता है। इस मौके पर जानिये इस बीमारी से जुड़े कुछ आम मिथक-
1. थायरॉयड को लेकर लोगों के मन में गलत सोच है कि ये बीमारी केवल महिलाओं को प्रभावित करती है – विशेषकर मध्यम आयु वर्ग या वृद्ध महिलाओं को। वहीं, सच्चाई ये है कि महिलाओं को इस बीमारी का खतरा 5 से 8 गुना अधिक होता है लेकिन यह पुरुषों को भी प्रभावित करता है। यहां तक कि शिशुओं, बच्चों और दोनों लिंगों के किशोरों में भी थायरॉयड की स्थिति हो सकती है।
2. लोगों को लगता है कि इस बीमारी को पहचानना आसान है। लेकिन बता दें कि थायरॉयड के हर मरीज में अलग-अलग लक्षण देखने को मिलते हैं। वहीं, कभी-कभी थकान और वजन बढ़ने जैसे अस्पष्ट लक्षणों के साथ, थायरॉयड रोग को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, या फिर इसे स्ट्रेस या मेनोपॉज का एक लक्षण मान लिया जाता है। ऐसे में लोग इस बीमारी को जल्दी नहीं पहचान पाते, इसलिए जरूरी है कि डॉक्टर्स को दिखाया जाए।
3. कई लोग ऐसा मानते हैं कि थायरॉयड कैंसर का इकलौता इलाज सर्जरी ही है, जिसे थायरॉयडेक्टॉमी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले के समय में थायरॉयड ग्लैंड को हटाने का यही एक उपाय था। हालांकि, वर्तमान में थायरॉयड कैंसर एक्सपर्ट्स मरीजों को एक्टिव सर्विलेंस की सलाह देते हैं जिसके तहत वो मरीजों में इस कैंसर आकार और प्रकार, और रोगी की उम्र और रोग के हिसाब से इलाज करते हैं।
4. यह एक मिथक है कि अगर आपके थायरॉयड ग्रंथि में गांठ है तो आपको कैंसर है। अनुमानित 95 प्रतिशत थायरॉयड नॉड्यूल्स बिनाइन होते हैं, यानि कि इनसे कैंसर का खतरा नहीं होता है। बता दें कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में नॉड्यूल्स या फिर गांठ आम हो जाते हैं। हालांकि, आपको इन गांठों की जांच किसी अच्छे हेल्थकेयर एक्सपर्ट्स से करवाते रहना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें कि थायरॉयड ग्लैंड में मौजूद हर गांठ कैंसर नहीं होता है।
5. थायरॉयड के मरीजों को लेकर अक्सर लोगों के मन में ये धारणा होती है कि मोटे लोग ही इस बीमारी से पीड़ित होते हैं और उनका वजन आसानी से नहीं घटता। यह एक मिथक है, हाइपोथायरॉयडिज्म में लोगों का वजन ज्यादा से ज्यादा 3 से 4 किलो तक बढ़ता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर कोई इस बीमारी के लिए दवा ले रहा है, तो यह संभव है कि बेसल मेटाबॉलिक रेट नीचे चला जाता है जिससे दूसरों की तुलना में इन मरीजों को वजन घटाने में मुश्किल हो सकती है।
