80 के दशक की हॉरर फिल्मों की गिनती आज भी बेहतरीन फिल्मों में होती है। उस दशक की ‘पुराना मंदिर’ और ‘बंद दरवाजा’ जैसी फिल्में आज भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। लंबी कद काठी वाले कलाकारों को ही मेकअप करके भूत बना दिया जाता था। भूतों और खूंखार विलेन के रोल के लिए डायरेक्टरों की पहली पसंद हुआ करते थे अनिरुद्ध अग्रवाल। उस दौर की हॉरर फिल्मों में अनिरुद्ध अग्रवाल खलनायकी का पर्याय बन चुके थे लेकिन आज वह हिंदी सिनेमा जगत से नदारद हैं। चलिए बताते हैं आखिर आज क्या कर हैं अनिरुद्ध अग्रवाल।
अनिरुद्ध अग्रवाल ने हीरो बनने की चाह में फिल्मों में कदम रखा था लेकिन कुछ भी उनके मनमाफिक नहीं हुआ। वह स्क्रीन पर डकैतियों और हत्याओं की योजना बनाते, हीरोइन को निहारते और पिटते हुए नजर आते थे और इसी तरह अनिरुद्ध मशहूर खलनायकों की लिस्ट में शामिल हो गए। अनिरुद्ध अग्रवाल के करियर में ‘बंद दरावाजा’, ‘पुरानी हवेली’ और ‘पुराना मंदिर’ जैसी फिल्में शामिल हैं। साथ ही ‘बैंडिट क्विन’ में भी उन्होंने ‘बाबू गुज्जर’ का अहम रोल निभाया था।
अनिरुद्ध का चेहरा और उनकी कद काठी ही उनके पॉपुलरिटी की वजह थी। हॉरर फिल्मों का दौर खत्म होने के बाद अनिरुद्ध अग्रवाल की सफर मुश्किल होने लगा था। हालांकि उन्होंने छोटे पर्दे की तरफ रुख किया लेकिन वहां भी कुछ खास हासिल नहीं हुआ। कुछ सीरियल्स में निगेटिव किरदार मिले लेकिन धीरे-धीरे वह भी कम होता चला गया।
अब पिछले 7 सालों से अनिरुद्ध छोटे बड़े पर्दे से भी गायब हैं। आखिरी बार अनिरुद्ध अग्रवाल विल्सन लुइस की मल्लिका (2010) में नजर आए थे। इसके बाद से लंबी कद काठी वाले इस खलनायाक ने फिल्मों की दुनिया को अलविदा कह दिया था। फिलहाल अनिरुद्ध अग्रवाल असल जिंदगी में बिजनेसमैन की भूमिका निभा रहे हैं। वह ज्यादा से ज्यादा समय परिवार के साथ बिताते हैं।
