भारतीय सिनेमा में मारधाड़ और खून-खराबा बढ़ता ही जा रहा है। फिल्मों में वॉयलेंस वाले सीन दिखाए जा रहे हैं। पहले रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ और फिल्म रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ में जमकर मार-धाड़ और खून खराबा दिखाया गया। इसके बाद अब रॉकिंग स्टार यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स‘ के टीजर में भी ये सब भरपूर देखने को मिला है। मगर सवाल ये है कि आखिर फिल्मों में इस तरह के सीन को इतना बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है।

खून खराबे से भरा है ‘टॉक्सिक’ का टीजर

टीजर से मारधाड़, बेरहमी, खून खराब दिखाया गया है। यश के किरदार को लड़ाई करते हुए देखा जा सकता है। ये फिल्म अंडरवर्ल्ड, सत्ता और अपराध की दुनिया के इर्द- गिर्द घूमती है। कुछ ही देर में इस टीजर को मिलियन व्यूज मिल गए हैं और लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं। वैसे तो दर्शकों को रोमांस, कॉमेडी, थ्रिलर, सस्पेंस वाली एंटरटेनर फिल्में पसंद हैं, मगर इन दिनों ऐसे वॉयलेंस से भरी फिल्मों को काफी पसंद किया जा रहा है।

‘धुरंधर’ के एक्शन ने तोड़े रिकॉर्ड

धुरंधर‘ फिल्म इस वक्त बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है। ये एक डार्क जासूसी-एक्शन थ्रिलर है, जिसकी कहानी सत्ता, बदले और देश की सुरक्षा के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में रणवीर सिंह एक ऐसे खुफिया एजेंट के किरदार में हैं, जो सिस्टम से बाहर रहकर देश के लिए सबसे खतरनाक मिशन को अंजाम देता है। कहानी एक ऐसे मिशन से शुरू होती है, जहां देश की आंतरिक सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा होता है। दुश्मन सामने नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर और बाहर फैला हुआ है। इसी दौरान नायक को अपने अतीत, निजी नुकसान और विश्वासघात से जूझना पड़ता है, जो उसे और ज्यादा बेरहम बना देता है।

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इस फिल्म में ऐसे खतरनाक सीन हैं, जो शायद कमजोर दिल वाले के लिए देखना काफी मुश्किल है। बावजूद इसके ‘धुरंधर’ रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही है। तमाम आलोचनाओं के बाद भी इसे काफी देखा जा रहा है और ये ही कारण है कि रणवीर सिंह स्टारर ने बॉक्स ऑफिस पर कुल 1230 करोड़ का बिजनेस कर लिया है।

‘एनिमल’ में हुआ था खूब खून-खराबा

‘धुरंधर’ से भी पहले रणबीर कपूर की फिल्म ‘एनिमल‘ में वॉयलेंस देखने को मिली थी। उस फिल्म की बहुत आलोचना हुई थी। फिल्म में रणबीर कपूर के किरदार को टॉक्सिक बताया गया था, लेकिन बावजूद इसके फिल्म ने वर्ल्डवाइड 917.82 करोड़ का बिजनेस किया था। फिल्म में रणबीर कपूर ने रणविजय का किरदार निभाया था, जो अपने पिता (अनिल कपूर) की सुरक्षा और सम्मान के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है। यही जुनून धीरे-धीरे उसे हिंसा, अपराध और बदले के रास्ते पर ले जाता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसका किरदार और ज्यादा बेरहम, क्रूर और आत्मविनाश की ओर बढ़ता जाता है।

यश की फिल्म में भी है वॉयलेंस

केजीएफ फिल्म में खून-खराबा कहानी का अहम हिस्सा है। फिल्म अंडरवर्ल्ड, सोने की खदानों और सत्ता की लड़ाई पर आधारित है, जहां हिंसा को ताकत और डर के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है। रॉकी के किरदार को एक ऐसे शख्स के तौर पर पेश किया गया है, जो अपने दुश्मनों पर खौफ कायम करने के लिए बेरहमी से वार करता है।

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क्यों बन रहीं हिंसक फिल्में?

दर्शकों की बदलती पसंद और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

अगर ध्यान दिया जाए तो पिछले कुछ सालों में दर्शक रॉ, रियल और इंटेंस कंटेंट देखना पसंद करने लगे हैं। एक्शन, बदले की आग वाली कहानियां उन्हें ज्यादा पसंद आने लगी हैं, इसलिए शायद मेकर्स उसी तरह की फिल्में बना रहे हैं। बॉक्स ऑफिस पर भी हिंसा से भरी फिल्मों ने अच्छी कमाई की है। जब ऐसी फिल्में सुपरहिट होती हैं, तो इंडस्ट्री उसी फॉर्मूले को दोहराने लगती है।

साउथ सिनेमा और पैन-इंडिया ट्रेंड

पहले केवल साउथ की फिल्मों में आक्रामक एक्शन दिखाया जाता था, लेकिन अब पूरे देश में नया ट्रेंड सेट हो गया है। पैन-इंडिया अपील के लिए बॉलीवुड भी उसी स्टाइल को अपना रहा है।

ओटीटी का असर

ओटीटी पर सेंसर बोर्ड का कोई दबाव नहीं रहता और वहां जो मर्जी दिखाया जाता है। ये भी एक कारण है कि फिल्ममेकर्स को ज्यादा बोल्ड और हिंसक कहानियां दिखाने की आजादी मिल गई है।

हीरो की डार्क इमेज का ट्रेंड

पहले की फिल्मों में हीरो की इमेज को पॉजिटिव दिखाया जाता था, लेकिन आज का हीरो परफेक्ट नहीं, बल्कि टूटा हुआ, गुस्सैल, बदले की भावना लिए खतरनाक दिखाया जा रहा है। इसलिए ज्यादातर फिल्मों में हीरो को वॉयलेंट दिखाया जाने लगा है और उनके हिंसक किरदार को पसंद भी किया जा रहा है।