Mahabharat 24th April Episode Updates: भीष्म पितामह पांडवों के बार में सोचकर काफी ज्यादा दुखी होते हैं। महामंत्री विदुर जब पितामह को राजधर्म याद दिलाने की कोशिश कर रहा होते हैं तो पितामह काफी ज्यादा भावुक हो जाते हैं। भीष्म पितामह प्रलाप कर रहे होते हैं। वह कहते हैं मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा हस्तिनापुर शकुनि के हाथ का खिलौना बन कर रह जाएगा। मेरे हाथ में अब कुछ नहीं है। देश प्रेम पर स्वार्थ ने विष का प्रयोग किया है मैं विवश हूं।

वहीं दूसरी ओर पांडवों को न तलाश कर पाने के चलते दुर्योधन काफी ज्यादा क्रोधित है। दुर्योधन अपने चाकरों से कह रहा है कि अगर पांडवों को जल्द से जल्द न तलाशा गया तो फिर वो सबको उनके परिवार समेत मौत के घाट उतार देगा। दुर्योधन का गुस्सा काफी ज्यादा बढ़ता जाता है। गांधारी ने अपने पति को समझाते हुए कहा कि महाराज अभी भी वक्त है देर नही हुई है। आप पांडवों को बुलाकर इन्द्रप्रस्थ उनको सौंप दे और उन्हें सुनहरे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दें। गांंधारी की बात सुन महाराज व्याकुल हो उठते हैं और कहते हैं कि अब बहुत देर हो चुकी है। अब यह संभव नही है।

वहीं पिछले एपिसोड में दिखाया गया था कि अर्जुन नकुल सहदेव को ढूंढने जाते हैं ऐसे में अर्जुन देखते हैं कि नकुल सहदेव दोनों सरोवर से समीप गिरे हुए हैं। अर्जुन दौड़कर जाते हैं और दोनों अनुजों की चिंता करने लगते हैं। वह चिल्लाते हैं कि किसने किया है सामने आओ किसने मारा मेरे भाइयों को? अर्जुन के सामने एक अज्ञात आता है और अर्जुन से सवाल करता है तभी अर्जुन सवाल के जवाब देने से मना करते हैं। और तालाब का पानी पी लेते हैं वह भी बेहोश हो जाते हैं।

अर्जुन के पीछे भीम जाते हैं उनके साथ भी ऐसा ही होता है। अब युधिष्ठर आते हैं वह देखते हैं कि चारों भाई भूमि पर चित पड़े हैं। तभी फिर आकाशवाणी होती है। युधिष्ठर से वह कहे हैं कि मैं यक्ष हूं मैंने ये किया है। मैंने इन्हें रोका था लेकिन ये नहीं माने। युधिष्ठर कहते हैं पूछिए। युधिष्ठर यक्ष के हर सवाल का जवाब दे देते हैं।

Live Blog

20:02 (IST)24 Apr 2020
सहदेव ने ली प्रतिज्ञा

अपने भाई नकुल को रोता देखकर सहदेवा काफी ज्यादा भावुक हो जाते हैं और ये प्रतिज्ञा लेते हैं कि जिस व्यक्ति ने हमारे कुल की आंखों में इतने आंसू दिए उस शकुनि की मृत्यु मेरे हाथों ही होगी मैं प्रतिज्ञा लेता हूं कि उस कायर को मार के ही दम लूंगा।

19:54 (IST)24 Apr 2020
दुर्योधन रहा है छटपटा

पांडवों को न तलाश कर पाने के चलते दुर्योधन काफी ज्यादा क्रोधित है। दुर्योधन अपने चाकरों से कह रहा है कि अगर पांडवों को जल्द से जल्द न तलाशा गया तो फिर वो सबको उनके परिवार समेत मौत के घाट उतार देगा। दुर्योधन का गुस्सा काफी ज्यादा बढ़ता जा रहा है।

19:46 (IST)24 Apr 2020
अर्जुन को देख द्रौपदी के छलके आंसू

अर्जुन के स्त्री के भेस में ढोलक बजाते हुए देख द्रौपदी भावुक हो जाती हैं और कहती हैं कि मुझे यकीन नही हो रहा कि इतने शूरवीर अर्जुन को आज भेस बदलकर ऐसा करना पड़ेगा। मुझे भीम को रसोईया युधिष्ठिर को चाकर बना देखकर काफी दुख हो रहा है। जिसपर अर्जुन कहते हैं कि हमें संकट में भी हंसना चाहिए क्योंकि जीवन सिर्फ मुस्कान है।

19:43 (IST)24 Apr 2020
अर्जुन ने बजाई ढोल

अर्जुन स्त्री के भेस में ढोलक बजाते हैं जिसपर उत्तरा पांव थिरकाती हैं। अर्जुन उत्तरा को समझाते हुए कहते हैं कि नृत्य केवल मनोरंजन के लिए नही होता बल्कि ये तो साधना होती है जिसे कठोर मेहनत करके ही प्राप्त किया जा सकता है।

19:33 (IST)24 Apr 2020
गांधारी ने महाराज धृतराष्ट्र को समझाया

गांधारी ने अपने पति को समझाते हुए कहा कि महाराज अभी भी वक्त है देर नही हुई है। आप पांडवों को बुलाकर इन्द्रप्रस्थ उनको सौंप दे और उन्हें सुनहरे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दें। गांंधारी की बात सुन महाराज व्याकुल हो उठते हैं और कहते हैं कि अब बहुत देर हो चुकी है। अब यह संभव नही है।

19:25 (IST)24 Apr 2020
धृतराष्ट्र ने लगाया राजा शांतनु पर आरोप...

धृतराष्ट्र राजा शांतनु पर आरोप लगाते हुए कहता है कि इसमें मेरा कोई कसूर नही है। सारा कसूर महाराज शांतनु का है जिन्होंन स्त्री मोह मेें पड़कर अपने बेटे भीष्म के साथ अन्याय किया था और राजपाठ उस शख्स को दे दिया जो उस वक्त पैदा भी नही हुआ था। इस वक्त हम उन्हीं के कर्मों का फल भोग रहे हैं।

19:21 (IST)24 Apr 2020
महाराज भरत ने मांगा धृतराष्ट्र से न्याय

महाराज भरत ने धृतराष्ट्र से न्याय की गुहार लगाई है जिसपर धृतराष्ट्र उनसे कहते हैं कि आप अतीत हैं मैं आपको कैसे न्याय दे सकता हूं। महाराज भरत उनसे कहते हैं कि मेरे दोषी तुम हो तुमने पांडू पुत्रों के साथ घोर अन्याय किया है तुमने पुत्रमोह में बंधकर बहुत बड़ा अनर्थ किया है। तुमने मेरे वंश को कंलकिंत किया है इसलिए मैं महाराज धृतराष्ट्र से गुहार लगाता हूं कि मुझे न्याय दें।

19:10 (IST)24 Apr 2020
कुंती और गांधारी में चल रहा है संवाद

गांधारी कुंती से कह रही हैं कि वो चाहती हैं कि अब पांडवों के साथ कुछ अन्याय न हो। गांधारी कुंती से कहती हैं अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए कोई शिकायत न होती तो तुम अबतक मुझसे मिलने क्यों नही आई जिसपर कुंती कहती हैं कि अगर मैं आपसे मिलने आती और आप मुझे आशिर्वाद देतीं तो फिर ऐसे में आपके पुत्र दुर्योधन को नुकसान पहुंचता।

19:07 (IST)24 Apr 2020
गांधारी के दिल में खटक रही है फांस

भीष्म दुर्योधन का साथ देने के चलते काफी ज्यादा दुखी हैं। ऐसा नही है कि ये दुख सिर्फ भीष्म ही झेल रहे हैं उनके अलावा राजमाता गांधारी को भी इस बात का दुख है कि पांडवों के साथ अन्याय हुआ। गांधारी कह रही हैं कि वो चाहती हैं कि जल्द से जल्द पांडव आएं और इन्द्रप्रस्थ पर राज करें।

18:31 (IST)24 Apr 2020
महाभारत 24 अप्रैल शाम का एपिसोड...

महाभारत में अब तक आपने देखा कि सिंधू देश का राजा जयद्रथ की तपस्या को देख कर भगवान शंकर परेशान हैं। पार्वती पूछती हैं कि परेशान क्यों हैं स्वमी। ऐसे में भगवन बताते हैं कि गलत होते हुए भी जयद्रथ घोर तपस्या कर रहा है ताकि वह वरदान मांग सके। अब मैं उसे कैसे वर दूं? इधर पांडव अपनी यात्रा पर हैं। चलते चलते पांचाली थक जाती हैं और उन्हें प्यास लगती है। पास में ही एक सरोवर होती है तो नकुल सरोवर में पानी लेने जाते हैं। काफी देर तक नकुल नहीं आते, ऐसे में युधिष्ठर सहदेव को पीछे भेजते हैं। सरोवर में दोनों भाइयों को कोई सावधान करता हैऔर कहता है कि तुम ये जल मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए बगैर नहीं पी सकते।

12:59 (IST)24 Apr 2020
देश प्रेम पर स्वार्थ ने विष का किया प्रयोग

इधर भीष्म पितामह प्रलाप कररहे हैं। वह कहते हैं मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा हस्तिनापुर शकुनि के हाथ का खिलौना बन कर रह जाएगा। मेरे हाथ में कुछ नहीं है। 'देश प्रेम पर स्वार्थ ने विष का किया प्रयोग, भीष्म विधुर दोनों विवश है असाध्य यह रोग।'

12:45 (IST)24 Apr 2020
दुर्योधन के गुप्तचर पांडवों को ढूंढते हुए आए जंगल में..

पांचों पांडव सही सलामत पांचाली के पास आ रहे होते हैं तभी द्रौपदी भागती हुई रास्ते में दिखाई देती है। युधिष्ठर पूछते हैं क्या हुआ पांचाली? पांचाली बताती हैं कि दुर्योधन के गुप्तचर उन्हें ढूंढते हुए यहां तक आ गए।

12:36 (IST)24 Apr 2020
धरती पर गिरे मिले नकुल सहदेव, बौखलाए अर्जुन- बोले किसने मारा मेरे भाइयों को?

अब अर्जुन नकुल सहदेव को ढूंढने जाते हैं ऐसे में अर्जुन देखते हैं कि नकुल सहदेव दोनों सरोवर से समीप गिरे हुए हैं। अर्जुन दौड़कर जाते हैं और दोनों अनुजों की चिंता करने लगते हैं। वह चिल्लाते हैं कि किसने किया है सामने आओ किसने मारा मेरे भाइयों को? अर्जुन के सामने एक अज्ञात आता है और अर्जुन से सवाल करता है तभी अर्जुन सवाल के जवाब देने से मना करते हैं। औऱ तालाब का पानी पी लेते हैं  वह भी बेहोश हो जाते हैं। अर्जुन के पीछे भीम जाते हैं उनके साथ भी ऐसा ही होता है। अब युधिष्ठर आते हैं वह देखते हैं कि चारों भाई भूमि पर चित पड़े हैं। तभी फिर आकाशवाणी होती है। युधिष्ठर से वह कहे हैं कि मैं यक्ष हूं मैंने ये किया है। मैंने इन्हें रोका था लेकिन ये नहीं माने। युधिष्ठर कहते हैं पूछिए। युधिष्ठर यक्ष के हर सवाल का जवाब दे देते हैं।

12:21 (IST)24 Apr 2020
सावधान...'जल मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए बगैर नहीं पी सकते', पांडवों को मिली चेतावनी

सिंधू देश का राजा जयद्रथ की तपस्या को देख कर भगवान शंकर परेशान हैं। पार्वती पूछती हैं कि परेशान क्यों हैं स्वमी। ऐसे में भगवन बताते हैं कि गलत होते हुए भी जयद्रथ घोर तपस्या कर रहा है ताकि वह वरदान मांग सके। अब मैं उसे कैसे वर दूं? इधर पांडव अपना यात्रा पर हैं। इधर चलते चलते पांचाली थक जाती हैं और उन्हें प्यास लगती है। पास में ही एक सरोवर होती है तो नकुल सरोवर में पानी लेने जाते हैं। काफी देर तक नकुल नहीं आते, ऐसे में युधिष्ठर सहदेव को पीछे भेजते हैं। सरोवर में दोनों भाइयों को कोई सावधान करता हैऔऱ कहता है कि तुम ये जल मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए बगैर नहीं पी सकते। 

12:12 (IST)24 Apr 2020
जयद्रथ का ऐसा हाल देख गुस्से से लाल पीला हुआ दुर्योधन

जयद्रथ कहता है कि ये पांच चोटियां उन पांट पांडवों का प्रतीक है, जो मुझमें प्रतिशोध की अग्नि बुझने नहीं देगी। दुर्य़ोधन गुस्से में कहता है कि इस तरह का काम आपके साथ होना हमारा अपमान भी है। मैं पांडवो को इस कर्म के लिए छोड़ूंगा नहीं-दुर्योधन कहता है। 

12:07 (IST)24 Apr 2020
प्रतिशोध की अग्नि में जल रहा जयद्रथ

शकुनि मांडवों से इतना जलता है कि उस जलवन ने उसे अंधा कर दिया है। धृतराष्ट्र जन्म से अंधे हैं। गांधारी ने आंखों में पट्टी बांध ली है। वहीं दुर्योधन कर्मों से अंधा है। इधर जयद्रथ ने भी कामवासना में गलत काम कर डाला। परांडों ने उसे सबक सिखाया, ऐसे में अब वह प्रतिशोध की अग्नि में जल रहा है। जयद्रथ कहता है कि यह मुंह न मैं अपने मित्रों न ही शत्रुओं को दिखा सकता हूं। ये पांच चोटियां मुझे डसती हैं। दुर्य़ोधन पूछता है किसने किया ये? जयद्रथ बताता है कि पांडवों ने किया है ये।