हिंदी फिल्म उद्योग की महत्त्वपूर्ण धरोहर रहे आरके फिल्म स्टूडियो को गोदरेज समूह की कंपनी गोदरेज प्रापर्टीज ने खरीद लिया है। यह कंपनी वहां की 2.2 एकड़ जमीन पर नई कहानी गढ़ेगी। कंपनी ने इस खरीद के बारे में कहा है कि आरके स्टूडियो की जमीन पर आलीशान फ्लैट और कारोबार केंद्र बनाए जाएंगे। दो साल पहले जब आरके स्टूडियो में अचानक आग लगी थी, तभी इस संपत्ति के मालिक कपूर खानदान ने तय कर लिया था कि वह इस ऐतिहासिक धरोहर को बेच देंगे। पिछले एक साल से वह किसी ऐसे खरीदार की तलाश कर रहे थे, जो स्टूडियो की अच्छी कीमत दे सके।
अब गोदरेज प्रॉपर्टीज के रूप में कपूर खानदान के आरके स्टूडियो को खरीदार मिला है। गोदरेज कंपनी ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि उन्होंने यह संपत्ति कितने में खरीदी है। गोदरेज समूह ने जानकारी दी है कि स्टूडियो की 33000 वर्ग फीट जमीन का इस्तेमाल लग्जरी फ्लैट और कारोबार केंद्र बनाने में किया जाएगा। कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष फिरोजशाह गोदरेज ने बताया कि इस ऐतिहासिक धरोहर को कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया है। इस सौदे को लेकर कपूर खानदान के रणधीर कपूर ने कहा, ‘चेंबूर में यह हमारे परिवार की महत्त्वपूर्ण धरोहर रही है। अब इस संपत्ति पर नई कहानी गढ़ने के लिए हमने गोदरेज को चुना है।’
वर्ष 2017 में लगी आग में स्टूडियो का बड़ा हिस्सा जल गया था। इसके बाद कपूर परिवार ने इसे बेचने की घोषणा कर दी थी। बॉलीवुड के मशहूर शोमैन राज कपूर ने 1948 में आरके स्टूडियो की नींव रखी थी। इस स्टूडियो में उन्होंने कई ऐसी फिल्में बनाईं, जो मील का पत्थर साबित हुईं। 16 सितंबर, 2017 को एक टीवी शो ‘सुपर डांसर’ शो के दौरान इसमें आग लग गई थी। उसके बाद अभिनेता ऋषि कपूर ने नई तकनीक के साथ इसके पुनर्निर्माण की इच्छा जाहिर की थी। लेकिन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने कहा था कि यह व्यावहारिक नहीं होगा। दरअसल, यहां शूटिंग करने वाले कम होते जा रहे थे। आरके स्टूडियो को बेचने के फैसले पर ऋषि कपूर ने तब कहा था, ‘हमने अपने दिलों पर पत्थर रखकर और सोच-समझकर यह फैसला लिया है। हम सभी भाई एक-दूसरे से काफी जुड़े हैं, लेकिन हमारे बच्चे और पोते क्या ऐसा कर पाएंगे? हम नहीं चाहते कि हमारे पिता के प्यार की निशानी किसी कोर्ट रूप का ड्रामा बने।’
कालजयी फिल्में दीं इस जगह ने आरके के बैनर तले इस स्टूडियो में ‘आग’, ‘बरसात’, ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘जिस देश में गंगा बहती है’, ‘मेरा नाम जोकर’, ‘बॉबी’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनी थीं। राज कपूर का 1988 में जब निधन हुआ था, तो उनके बड़े बेटे रणधीर कपूर ने इसका जिम्मा संभाला। इसके बाद उनके भाई राजीव कपूर ने यहीं ‘प्रेम ग्रंथ’ का निर्देशन किया था। इस स्टूडियो में बनी आखिरी फिल्म थी ‘आ अब लौट चलें।’
पाई-पाई जोड़ी थी राज कपूर ने
राज कपूर ने 71 साल पहले पाई-पाई जोड़ आरके स्टूडियो बनवाया था। इसके लिए उन्हें कर्ज तक लेना पड़ गया था। यहां बनाई ‘बरसात’ फिल्म इतनी चली कि उन्होंने इसकी आमदनी से न सिर्फ अपना कर्ज उतारा, बल्कि चेंबूर में 2.2 एकड़ की जमीन आरके स्टूडियो के लिए खरीद ली। चेंबूर में जमीन खरीदने की वजह यह थी कि उस समय वहां पहाड़ और हरियाली और वीरानी का माहौल था। यह 1948 की मुंबई थी।

