Barrister Babu 13 Feb 2020, 3rd Preview Episode: शो बेरेस्टर बाबू की कहानी मासूम बॉन्दिता की नटखट शरारतों के साथ आगे बढ़ती है। बॉन्दिता अपनी विधवा मा के साथ बैठी होती है तभी शादी का टॉपिक छिड़ता है। इस बीच बॉन्दिता अपनी मां शादी के कॉन्सेप्ट के बारे में पूछती है। बॉन्दिता की मां उसे बताती है कि ‘विवाह के बाद हर लड़की को अपना सबकुछ छोड़ कर अकेले ही जाना होता है। तुझे भी अकेले ही जाना होगा बेटा यही रीत है।’

ऐसे में बॉन्दिता के मन में ये सवाल घूमता है, जिसका परिणाम ये निकला है कि वह एक चिट्ठी में अपने सवाल लिख लेती है। वह चिट्ठी अपने पति को देने के लिए लिखती है। बॉन्दिता कहती है- अगर पति ही रीत बदलदे तो? वह लिखती है-‘ आपसे विवाह करने की दो शर्ते हैं मेरी। पहली मेरी मां मेरे साथ जाएगी और दूसरी हांडी भरके रौशोगोला खाने को चाहिए रोज। ये पत्र जाकर मैं दे दूंगी।’

उस पत्र को लेकर वह जा पहुंचेगी अपने ससुराल। क्या होगा जब बॉन्दिता के रिश्तेदारों और उसकी मां को इस बारे में खबर होगी ? बॉन्दिता की ये मासूम सी शर्त को किस तरह देखेगा ये समाज? खास बात  ये है कि इस बीच अनिरुद्ध बाबू के टांगे से बॉन्दिता टकराते टकराते बचती है। बॉन्दिता को पहली नजर में देख कर ही अनिरुद्ध सोच में पड़ जाते हैं।

क्या सोच रहे हैं अनिरुद्ध बाबू? अनिरूद्ध बॉन्दिता को डाकिया को चिट्ठी देतेस देख लेगे। बॉन्दिता के लिए वह चिट्ठी पते तक पहुंचाना कितनी जरूरी है यह देख कर अनिरुद्ध रुक जाते हैं। बॉन्दिता को अनुरुद्ध ये कहते सुन लेंगे कि वह चिट्ठी पते पर पहुंचनी जरूरी क्यों है?