दिल्ली में तीन मार्च से शुरू हो रहे आगामी 12वें ‘आइएडब्ल्यूआरटी एशियन वुमेंस फिल्म फेस्टीवल’ में एशियाई मूल की भारतीय महिला फिल्म निर्देशकों की एनिमेशन, डॉक्यूमेंट्री, प्रयोगधर्मी, लघु गल्प से लेकर गल्प फिल्में दिखाई जाएंगी। 2005 में शुरू हुआ यह महोत्सव हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आसपास आयोजित होता है। महोत्सव के लिए विशेष वर्ग ‘वॉयस आॅफ फिलस्तीन’ के तहत फिलस्तीन की 11 फिल्मों सहित 13 देशों से 35 फिल्में शामिल की गई हैं। महोत्सव की निदेशक उमा टनुकु ने कहा, ‘फिल्म महोत्सव का रोचक पहलू यह है कि इसमें ‘साउंडफाइल्स’ नामक ऑडियो सेगमेंट होगा। यह तीसरा साल है जब हम इस तरह के सेगमेंट को प्रदर्शित करेंगे जिसमें कलाकार अपनी ध्वनि प्रविष्टियां भेजते हैं।’
टनुकु आराधना कोहली के साथ मिलकर महोत्सव का संचालन कर रही हैं। तीन दिवसीय इस महोत्सव में बांग्लादेश, ईरान, इस्राइल, जापान, म्यांमार, फिलिपीन, दक्षिण कोरिया, सीरिया, ताइवान, तुर्की, अमेरिका, वियतनाम सहित भारत और फिलस्तीन के 24 फिल्मकार और आवाज की दुनिया के कलाकार हिस्सा लेंगे।
फिल्मों के ऐतिहासिक पहलुओं को दिखाने के लिए सिनेमा में महिला आंदोलन को दस्तावेजबंद करने पर सेमिनार का आयोजन होगा जिसमें 80 और 90 के दशक में महिला आंदोलन से प्रेरित फिल्में दिखाई जाएंगी। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास 80 और 90 के दशक में दिखाई गर्इं सती, शराब विरोधी आंदोलन एवं अन्य आंदोलनों पर केंद्रित फिल्में हैं। सेमिनार में निर्देशक दीपा धनराज, कलाकार शीबा चाची, शबा दीवान और छात्रा पल्लवी कौल हिस्सा लेंगी।’ इस दौरान नारीवादी विद्वान उमा चक्रवर्ती अैर शिखा झींगन अपने विचार रखेंगी।
