आरती सक्सेना
कौन बनेगा करोड़पति भावनात्मक तौर पर आपके लिए कितना मायने रखता है?
’ यह शो मेरे दिल के बहुत करीब है। सन 2000 से मैं इससे जुड़ा हुआ हूं। इस शो की सबसे खास बात यह है कि आप अपने ज्ञान के जरिए शो में जीत हासिल और पैसे कमा सकते हैं। मैंने केबीसी के कई सारे शो किए हैं और इस दौरान मैंने भी प्रतियोगियों के जरिए बहुत ज्ञान प्राप्त किया है। ज्यादातर होता यह है कि हमें हर क्षेत्र की जानकारी नहीं होती। लेकिन केबीसी से जुड़ने के बाद मुझे कई सारे क्षेत्रों की जानकारी हो गई और मेरे सामान्य ज्ञान का स्तर भी काफी ऊंचा हो गया है।
आप एक बार फिर केबीसी के जरिए अपने प्रशंसकों से जुड़ने जा रहे हैं। कैसा महसूस कर रहे हैं?
’ बहुत खुशी हो रही है। दरअसल, मानसिक तौर पर भी मैं इस शो से इतना जुड़ गया हूं कि जब यह शो नहीं करता तो मैं इसे बहुत मिस करता हूं। इस शो और इसमें भाग लेने वाले प्रतियोगियों के जरिए मैंने सीखा है कि अगर आपमें मेहनत करने का जज्बा है, आपका हौसला बुलंद है और आप शिक्षित हैं, तो आप कितनी ही मुश्किलें आएं, जीत हासिल करने से नहीं चूकते। इस शो में आए हुए ऐसे प्रतियोगियों से मिल कर मुझे बहुत खुशी होती है, जो आम होते हुए भी बहुत खास हैं।
केबीसी की शूटिंग के दौरान क्या कभी कोई ऐसा हादसा हुआ, जिसके बाद आपको जागरूकता पैदा करने की या जागरूक रहने का एहसास हुआ हो?
’ हां, केबीसी के दौरान ही सन 2000 में मेरी पीठ में असहनीय दर्द उठा था। जब चेकअप करवाया तो पता चला कि मुझे टीबी है। तुरंत मैंने इलाज करवाया तो ठीक भी हो गया। उसी दौरान मुझे एहसास हुआ कि हमें किसी भी बीमारी को नजरंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि उसका समय रहते इलाज करवा लेना चाहिए। इससे बड़ी मुसीबत से बच जाएंगे। कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान मेरा जोरदार एक्सीडेट हो गया था। उस दौरान कई लोगों ने मुझे खून दिया। उसमें से किसी एक व्यक्ति को लीवर से जुड़ी बीमारी थी। उसके बाद मुझे भी वह बीमारी शुरू हो गई और जब तक इस बात का पता चला, मेरा पचहत्तर प्रतिशत लीवर डैमेज हो चुका था। फिलहाल मैं पच्चीस प्रतिशत लीवर पर जिंदा हूं। अगर समय रहते इस बात का पता चल जाता, तो मैं इतनी बुरी कंडीशन में न आता। केबीसी के दौरान ही इस बात का एहसास हुआ कि किसी भी बीमारी को छोटा समझ कर नजरंदाज नहीं करना चाहिए। तुंरत उसका इलाज करवाना चाहिए।
कौन बनेगा करोड़पति के दौरान जब प्रतियोगी आपके सामने हॉट सीट पर बैठते हैं, तो आपको और केबीसी के भव्य सेट को देख कर घबरा जाते हैं। ऐसे में आप उनकी हौसला आफजाई कैसे करते हैं?
’ हां, यह सच है। प्रतियोगी चंूकि सीधे-सादे होते हैं और कई बार गरीब परिवार से भी इस शो में हिस्सा लेने आते हैं, ऐसे में जब वे मुझे और भव्य सेट को देखते हैं, तो घबरा जाते हैं और सही जवाब जानते हुए भी गलत जवाब देने वाले होते हैं, उस वक्त मैं उनसे इधर-उधर की बात करके उनका मन शांत करता हूं और उनको समय देता हूं कि वे अपना जवाब सही ढंग से दे सकें।

क्या कोई ऐसी समस्या है, जिसे आप केबीसी के जरिए खत्म करने या लोगों को उसके प्रति जागरूक करना चाहते हैं?
’ हां, बहुत सारी समस्याएं हैं, जिनके प्रति मैं लोगों को जागरूक बनाना चाहता हूं, जैसे पोलियो का टीका, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत अभियान। ये ऐसी समस्याएं हैं, जिसके प्रति लोगों को जागरूक करना सबसे ज्यादा जरूरी है। खासकर लड़कियों के प्रति जागरूकता बहुत जरूरी है। आज भी हमारे समाज में लड़कियों के साथ न्याय नहीं होता। कई गांव खेड़े और शहरों में लड़कियों की पढ़ाई पर भी रोक लगाई जाती है, जबकि सच्चाई यह है कि केबीसी में ही कई सारी लड़कियां अपने ज्ञान से लाखों की धनराशि जीत कर जाती हैं और देश और अपने परिवार का नाम ऊंचा करती हैं।
समाज में आज जो औरतों का अपमान हो रहा है, कई हादसे हो रहे हैं, उस पर क्या कहना चाहेंगे आप?
’ सीधी-सी बात है, अगर आप किसी लड़की या महिला में अपनी मां, बहन या बीबी को देखेंगे तो आप अपने आप ही उसका सम्मान करेंगे। कहने का मतलब यह है कि औरत का सम्मान करना किसी स्कूल का पाठ नहीं है, बल्कि यह शिक्षा घर से संस्कारों में दी जानी चाहिए, ताकि कोई भी आदमी अगर औरत के साथ अभद्र व्यवहार करने की कोशिश करे तो उसको अपने अच्छे संस्कार ऐसा करने से रोकें।
आपने जिंदगी को काफी करीब से देखा है। ऐसे में आप उन लोगों को क्या सीख देना चाहेंगे, जो छोटी उम्र में ही छोटी-छोटी बातों से जिदंगी में निराश हो जाते हैं?
’ यही कि जिदंगी को लेकर ज्यादा गंभीर न हों। क्योंकि हमें नहीं पता कि एक मिनट या यों कह सकते हैं एक क्षण के बाद क्या होने वाला है। कभी अच्छा तो कभी बुरा सब ऊपर से तय है। लिहाजा, जिंदगी पूरी तरह जीएं और सब कुछ भगवान पर विश्वास करके भगवान पर छोड़ दें। बस अपने कर्म सही रखें, क्योंकि भगवान इंटेशन देखता है, प्रजेंटेशन नहीं।

