नोटबंदी के बाद नित नए फरमान जारी होने से इस धारणा को और बल मिला है कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी के इतना बड़ा कदम उठा लिया। सरकार और रिजर्व बैंक ने पुराने नोट जमा कराने की समय-सीमा खत्म होने से ग्यारह दिन पहले एक नया आदेश जारी किया। वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक की अलग-अलग जारी अधिसूचना के मुताबिक अब पांच हजार से अधिक की रकम केवल एक बार में जमा कराई जा सकती है। यही नहीं, पांच हजार से ज्यादा जमा कराने वाले को दो बैंक अधिकारियों की उपस्थिति में बताना होगा, जिसका रिकार्ड रखा जाएगा, कि वह अभी तक इस राशि को जमा क्यों नहीं करा सका? रिकार्ड करने के पीछे इरादा यह है कि आॅडिट के दौरान उसका इस्तेमाल किया जा सके। रिजर्व बैंक ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर किसी खाते में पांच हजार से कम राशि के नोट एक से ज्यादा बार जमा कराए जाते हैं और कुल रकम पांच हजार से ज्यादा हो जाती है तो वह जांच के दायरे में होगी। नए नियम का मकसद सरकार ने यह बताया है कि काले धन को सफेद करने के लिए दूसरों के खातों का इस्तेमाल न हो सके। पर सवाल है कि सारे निरोधक उपाय पहले ही क्यों नहीं सोच लिये गए?

यह तो कोई भी अनुमान लगा सकता था कि विमुद्रीकरण की सूरत में, नोटबदली के जरिए, काली मुद्रा को सफेद करने की कोशिश होगी। फिर सरकार और रिजर्व बैंक के अधिकारी इसके मद््देनजर सारे एहतियाती उपाय क्यों नहीं सोच पाए? टुकड़े-टुकड़े में रोज नए-नए नियम जारी होने से संशय का माहौल बनता है। बहुत-से लोग गफलत में रहते हैं कि पता नहीं नया नियम क्या है, या सोचते हैं कि क्या पता कल कौन-सा आदेश जारी हो जाए। प्रधानमंत्री ने आठ नवंबर के राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि अमान्य किए जा चुके नोट तीस दिसंबर तक बैंक खातों में जमा कराए जा सकेंगे। लेकिन अब यह पूछा जाएगा कि उन्नीस दिसंबर से पहले ये नोट क्यों नहीं जमा कराए? ऐसे लोग हो सकते हैं जो यात्रा में या घर से दूर रहे हों या सोच रहे थे कि आखिरी दिनों में भीड़भाड़ कम रहने पर वे अपने नोट जमा करा देंगे। पर अब उन्हें नाहक पूछताछ से गुजरना होगा। सही है कि जिनकी कमाई वैध है उन्हें डरने की जरूरत नहीं, पर नई-नई शर्तों और नए-नए नियमों ने उनकी परेशानी तो बढ़ाई ही है।

यही नहीं, नोटबंदी के बाद काम के बोझ से दबे बैंकों के लिए तनाव का एक और सबब हो गया है। क्या सभी बैंक शाखाओं के पास इतने कर्मी हैं कि वे नए नियम के पालन के लिए दो अधिकारियों को तैनात कर सकें? दूसरे, काला धन सफेद होने की आशंका में पांच हजार की जो सीमा सरकार ने तय की है वह बहुत कम है। विडंबना यह है कि काले धन को खत्म करने के जिस बड़े लक्ष्य से नोटबंदी की गई, वह लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा। चलन से हटाए गए नोटों की कितनी मात्रा बैंकों में जमा हुई है, इस बारे में कोई अद्यतन आंकड़ा नहीं है, पर जानकारों का अनुमान है कि चलन से हटाए गए लगभग सभी नोट वापस आ रहे हैं। यह सरकार के लिए बेचैनी का भी विषय हो सकता है, और शायद हताशा का भी। जो हो, सरकार की अपनी ही घोषणाओं में संशोधन करते रहने से अच्छा संदेश नहीं गया है।